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बिहार में चाय की खेती के लिए किसानों को मिलेगी मदद


Tea Farming Tips: केन्द्र सरकार के साथ-साथ देश के कई राज्यों की सरकारें किसानों के लिए अलग-अलग तरह की योजनाएं चलाती हैं. कुछ योजनाएं किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ देती है. तो वहीं कुछ योजनाएं किसानों की खेती में लागत कम करती है. बिहार सरकार की ओर से किसानों के लिए ऐसी ही एक योजना लाई गई है. जिसमें चाय की खेती करने के लिए मदद मिलेगी.

नार्मली लोगों को लगता है कि चाय सिर्फ असम और दार्जिलिंग जैसे इलाकों में ही उगाई जा सकती है. लेकिन अब बिहार में भी इसे उगाया जा रहा है. इस काम में मदद देने के लिए बिहार सरकार ने चाय विकास योजना शुरु की है. इस योजना के मकसद सीमांचल क्षेत्र में चाय की खेती का दायरा बढ़ाना और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. जान लें कैसे मिलेगा किसानों को इस योजना का लाभ.

किन किसानों को मिलेगा योजना का लाभ?

बिहार का सीमांचल क्षेत्र, जिसमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिले आते हैं वहां चाय की खेती के लिए सही जमीन और मौसम है. यहां की मिट्टी और मौसम चाय की पत्तियों के सही  साबित हो रहा है. योजना के जरिए सरकार किसानों को चाय बागान लगाने के लिए मोटिवेट कर रही है.

चाय की खेती बाकी कई फसलों के मुकाबले काफी ज्यादा मुनाफा देती है. सरकार का टारगेट है कि इस पूरे इलाके को चाय उत्पादन का एक नया केंद्र बनाया जाए है. जिससे बिहार का नाम भी देश के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों की लिस्ट में शामिल हो सके.

सरकार कितनी मदद दे रही है?

चाय की खेती शुरू करने में शुरुआती लागत काफी ज्यादा आती है. इसी को देखते हुए बिहार सरकार किसानों को भारी-भरकम सब्सिडी मुहैया करा रही है. चाय के नए बागान लगाने से लेकर उनकी देखरेख और खाद-पानी के सही इस्तेमाल के लिए सरकार लागत का एक बड़ा हिस्सा खुद उठाएगी.

इस योजना के जरिए मिलने वाली आर्थिक मदद सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी. जिससे उन्हें पैसों की कमी की वजह से अपना काम बीच में रोकना न पड़े. योजना में दी जाने वाली सब्सिडी  छोटे किसान भी बेझिझक चाय बागवानी में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं और कम लागत में अपना खुद का चाय बागान तैयार कर सकते हैं.

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चाय की खेती बन रही है कमाई का नया जरिया

चाय एक ऐसी फसल है जिसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. एक बार बागान तैयार होने के बाद कई वर्षों तक लगातार उत्पादन मिलता है. बिहार में सीमांचल का मौसम इस खेती के लिए एकदम सही माना जाता है. यही वजह है कि यहां चाय का रकबा लगातार बढ़ाने की कोशिश हो रही है.

अगर किसान अच्छी क्वालिटी वाली पत्तियां तैयार करें और प्रोसेसिंग के साथ मार्केटिंग करें तो दूसरी फसलों के मुकाबले इसमें ज्यादा इनकम मिलने के चांस है. सरकार की इस स्कीम से इलाके में रोजगार के नए मौके भी बन सकते हैं. 

खेती शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

चाय की खेती एक लंबे समय की खेती होती है. इसलिए इसे शुरू करने से पहले पूरी तैयारी कर लेना जरूरी है. खेत में मिट्टी, पानी निकलने की व्यवस्था और पौधों की क्वालिटी इन चीजों पर सबसे पहले ध्यान देने की जरूरत है. 

इसके साथ ही किसानों को कृषि विभाग या संबंधित अधिकारियों से तकनीकी सलाह लेकर ही पौधरोपण शुरू करना चाहिए. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए समय पर आवेदन करना और जरूरी दस्तावेज तैयार रखना भी जरूरी है. सही जानकारी और सरकारी सहयोग के साथ सीमांचल के किसान चाय की खेती को अपनी आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बना सकते हैं.

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