भारत ने अमेरिका को बंधुआ मजदूर वाले बयान पर करारा जवाब दिया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारतीयों के लिए ‘इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ यानी की बंधुआ मजदूर कहा था. इस पर भारत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अमेरिका का इतिहास सालों से वहां पहुंचे प्रवासियों के योगदान की वजह से बेहतर हुआ है. भारत ने कहा कि जेडी वेंस के ऐसे बयान से औपनिवेशिक सोच का पता चलता है. यह दर्दनाक यादों को ताजा करता है.
विदेश मंत्रालय ने जेडी वेंस के बयान का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस मामले में हमने अमेरिकी उपराष्ट्रपति की कुछ टिप्पणियां देखी हैं. हमारा मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां अनुचित हैं और इस तथ्य की अनदेखी करती हैं कि अमेरिका में भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल हैं. वे अमेरिका की इकॉनमी और इनोवेशन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.’
‘वेंस का बेहद आपत्तिजनक बयान’ – विदेश मंत्रालय
उसने कहा, ‘अमेरिका का इतिहास भी पीढ़ियों से वहां पहुंचे प्रवासियों के योगदान की वजह से आकार लेता रहा है. उनके श्रम और उद्यमशीलता ने अमेरिका की प्रगति और समृद्धि में अहम भूमिका निभाई है. ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना, जिनमें दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की झलक मिलती है, बेहद आपत्तिजनक है.’
भारतीयों की वजह से अमेरिका को भी फायदा – विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीयों की वजह से अमेरिका को भी फायदा रहा है. उसने बयान में कहा, ‘यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रतिभाओं की आवाजाही से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होता है. इससे भारतीयों के लिए अवसर पैदा होते हैं, वहीं अमेरिकी कंपनियों को भी अत्याधुनिक कौशल वाले प्रतिभाशाली पेशेवरों का लाभ मिलता है. इससे इनोवेशन, रिसर्च और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है. अमेरिका की संपत्ति में भी इजाफा हो रहा है.’
H-1B वीजा पर क्या बोला भारत
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘यह ध्यान देना जरूरी है कि PERM कार्यक्रम, H-1B वीजा कार्यक्रम से अलग है. PERM आवेदनों पर रोक लगने से अपने आप मौजूदा H-1B वीजा की वैधता या H-1B वीजा धारकों और उनके आश्रितों की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ता. हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों के स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर इसका कुछ असर पड़ सकता है.’
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