अयोध्या में हुए मछली भोज को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंगलवार (25 अगस्त, 2026) कहा कि लोगों के खान-पान और धार्मिक आस्था को राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी आस्था और धार्मिक मान्यताएं होती हैं, इसलिए इन मामलों पर राजनीति करने से बचना चाहिए.
अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा, “खाने-पीने और सामाजिक सरोकार पर सवाल उठाना, मैं उचित नहीं समझता हूं. लोगों की अलग-अलग आस्था है.” उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के लिए सावन महत्वपूर्ण है तो दूसरे व्यक्ति की अपनी अलग धार्मिक मान्यता हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि किसी के कहने से कोई व्यक्ति अपना धर्म या धार्मिक मान्यताएं नहीं बदल देगा. ऐसे में इन सवालों को राजनीतिक विवाद में बदलना ठीक नहीं है.
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मछली भोज पर क्यों छिड़ा विवाद?
दरअसल, अयोध्या में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान मछली भोज को लेकर विवाद खड़ा हुआ था. इस कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी शामिल हुए थे. इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर धार्मिक विरासत और आस्था के अपमान का आरोप लगाया था.
यूपी के सीएम योगी ने सवाल उठाया था कि हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन करने के बाद मछली का भोज आयोजित करना कांग्रेस के दोहरे आचरण को दिखाता है. मुख्यमंत्री के बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई.
अजय राय ने भी दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद अजय राय ने कहा था कि उन्होंने मछली नहीं खाई, बल्कि निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने कहा था कि निषाद समाज की जीवनशैली में मछली पालन और उसका सेवन शामिल है. अजय राय ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर उनके पास उन्हें मछली खाते हुए कोई तस्वीर है तो सामने लाएं, वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं.
टीवी डिबेट में भी बढ़ा विवाद
मछली भोज का मुद्दा टीवी डिबेट तक पहुंचा तो अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास और कांग्रेस प्रवक्ता कुंवर सिंह निषाद के बीच तीखी बहस हो गई. बहस के दौरान दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि राजू दास ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और धमकी तक दे दी. इसके बाद एंकरों को कार्यक्रम बीच में ही खत्म करना पड़ा.
इसी पूरे विवाद के बीच अखिलेश प्रसाद सिंह ने खान-पान और धार्मिक आस्था को लेकर राजनीति नहीं करने की अपील की है. उनका कहना है कि देश में अलग-अलग समुदायों और लोगों की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं. ऐसे मुद्दों पर एक-दूसरे की आस्था पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.
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