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मलबा, टूटी गाड़ियां, 14 महीने बाद भी निशान, AI-171 क्रैश साइट का आंखों देखा हाल


12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए AI-171 विमान हादसे को 14 महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है. हादसे में 260 लोगों की जान गई थीं, लेकिन मेघाणी नगर स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स हॉस्टल के आसपास पहुंचने पर ऐसा लगता है जैसे वक्त उसी दिन थम गया हो. जली हुई गाड़ियां, टूटी इमारत, बिखरे कांच और मलबे के निशान आज भी हादसे की भयावहता बयां करते हैं.

14 महीने बाद भी नहीं बदला मंजर

12 जून 2025 की वह दोपहर अहमदाबाद कभी नहीं भूल सकता. एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 ने उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद नियंत्रण खो दिया और बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से जा टकराई. देखते ही देखते आसपास का इलाका आग और धुएं से भर गया. आज 14 महीने बाद भी उस जगह पर हादसे के निशान साफ दिखाई देते हैं. हॉस्टल की दीवारों पर काले धुएं के निशान हैं. आसपास खड़ी कुछ गाड़ियां जली और बुरी तरह मुड़ी हुई दिखाई देती हैं. टूटे शीशे और मलबा उस दोपहर की तबाही की गवाही देते हैं. यहां न कोई बड़ी हलचल नजर आती है न मलबा हटाने का काम. ऐसा लगता है जैसे इस जगह पर वक्त रुक गया हो.

फाइनल रिपोर्ट का इंतजार क्यों लंबा हुआ?

हादसे की जांच रिपोर्ट को लेकर भी इंतजार खत्म नहीं हुआ है. शुरुआती रिपोर्ट के बाद उम्मीद थी कि हादसे की पहली बरसी यानी 12 जून 2026 तक तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू का कहना है कि जांच अंतिम चरण में है और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए रिपोर्ट तैयार की जा रही है. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट अक्टूबर के पहले हफ्ते में सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी. मामले में अगली अहम सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है.

कॉकपिट में आखिर हुआ क्या था?

AI-171 हादसे की जांच में सबसे बड़ा सवाल कॉकपिट के उन आखिरी सेकंड को लेकर है. 12 जुलाई 2025 को सामने आई शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक टेकऑफ के कुछ ही सेकंड बाद दोनों इंजनों का थ्रस्ट खत्म हो गया था. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच करीब एक-एक सेकंड के अंतर पर ‘RUN’ से ‘CUTOFF’ स्थिति में चले गए. कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट को दूसरे से यह पूछते सुना गया कि उसने कटऑफ क्यों किया. जवाब में दूसरे पायलट ने कहा कि उसने ऐसा नहीं किया.

यही सवाल अब भी जांच का सबसे अहम हिस्सा बना हुआ है, अगर दोनों पायलटों ने स्विच बंद नहीं किए तो दोनों इंजन CUTOFF मोड में कैसे पहुंचे? क्या यह तकनीकी खामी थी या इसके पीछे कोई और वजह थी? इसका जवाब फाइनल रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है. परिवारों की मांग है कि जांच की जानकारी सार्वजनिक हो.

हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों समेत कुल 260 लोगों की मौत हुई थी. विमान में सवार सिर्फ एक यात्री की जान बची थी. अब 30 पीड़ित परिवारों ने जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं. परिवारों की मांग है कि जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उनके साथ साझा की जाए. इसके अलावा स्वतंत्र जगह पर सिम्युलेटर टेस्ट कराने और जांच कमेटी में एक सक्रिय एवं पेशेवर पायलट को शामिल करने की मांग भी उठी है.

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ग्राउंड जीरो पर आज भी वही सवाल

अहमदाबाद के मेघाणी नगर में खड़ी जली हुई गाड़ियां और हादसे के निशान आज भी उस दोपहर की याद दिलाते हैं. 260 लोगों की मौत के 14 महीने बाद भी सबसे बड़ा सवाल जवाब का इंतजार कर रहा है. अब निगाहें अक्टूबर पर हैं. सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में फाइनल ड्राफ्ट रिपोर्ट पेश किए जाने की बात कही गई है. देखना होगा कि इस रिपोर्ट से AI-171 हादसे की सबसे बड़ी गुत्थी सुलझती है या हादसे से जुड़े सवाल अभी और लंबे समय तक अनुत्तरित रहते हैं.

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