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महाराष्ट्र: अन्ना हजारे के अनशन का असर, फडणवीस सरकार ने RTI के नए नियमों पर लगाई रोक


सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) में किए गए विवादास्पद संशोधनों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राज्य सूचना आयोग को भेजे गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने इन बदलावों को स्थगित करने का निर्णय लिया है.

राज्य में सूचना का अधिकार अधिनियम से जुड़े अत्यंत विवादास्पद बदलावों को लेकर राज्य सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है. वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे द्वारा इन बदलावों के विरोध में किए गए आंदोलन और उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीधे हस्तक्षेप किया. मुख्यमंत्री द्वारा राज्य सूचना आयोग को भेजे गए पत्र पर विचार करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने इन बदलावों को स्थगित करने का निर्णय लिया है. इस फैसले को सूचना के अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत कार्यकर्ताओं और अन्ना हजारे के आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है.

अन्ना हजारे के अनशन पर अडिग रहने सीएम फडणवीस का सीधा हस्तक्षेप

अन्ना हजारे के अनशन पर अडिग रहने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं इस मामले में पहल की. मुख्यमंत्री ने राज्य सूचना आयोग को एक पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि, ‘वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा किए बिना सूचना का अधिकार अधिनियम में कोई भी बदलाव या निर्णय लेना उचित नहीं होगा.’ मुख्यमंत्री की इस महत्वपूर्ण पहल और अनुरोध के बाद राज्य मुख्य सूचना आयोग ने 12 जून को राजपत्र में प्रकाशित सभी संशोधनों को फिलहाल स्थगित कर दिया है.

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सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जारी हुई थी संशोधित अधिसूचना

इस बीच, वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी फडणवीस सरकार को अनशन की चेतावनी दी थी. राज्य सरकार ने 12 जून को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के संबंध में संशोधित अधिसूचना जारी की थी, जिसका सामाजिक संगठनों ने विरोध किया था.

अब तक सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगने के लिए आवेदन शुल्क 10 रुपये था, जिसे बढ़ाकर 30 रुपये कर दिया गया था. इसके साथ ही प्रथम अपील के लिए 50 रुपये तथा द्वितीय अपील के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था.

नए बदलावों से आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना होगा मुश्किल 

प्राप्त जानकारी की प्रति के लिए शुल्क भी 2 रुपये प्रति पृष्ठ से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति पृष्ठ कर दिया गया था. इन बदलावों सहित कुल 12 नए नियम लागू किए गए थे. सामाजिक संगठनों का कहना था कि इन नियमों से आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा.

अन्ना हजारे ने कहा था कि सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, न कि कमाई का साधन. कुछ लोग इसका दुरुपयोग करते हैं, इसलिए कुछ शुल्क आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि सरकार इन बदलावों को वापस नहीं लेती है, तो वे अनशन पर बैठेंगे.

सूचना का अधिकार अधिनियम में यह प्रमुख बदलाव

  1. आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये किया गया.
  2. सूचना की प्रति का शुल्क 2 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति पृष्ठ किया गया.
  3. एक आवेदन में केवल एक ही विषय शामिल किया जा सकेगा.
  4. आवेदन 150 शब्दों के भीतर होना अनिवार्य किया गया.
  5. फोटो पहचान पत्र संलग्न करना अनिवार्य किया गया.
  6. प्रथम अपील के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया.
  7. द्वितीय अपील के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया.
  8. यदि जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है, तो आवेदक को वहीं से जानकारी लेने के लिए कहा जा सकेगा.
  9. बार-बार किए जाने वाले समान आरटीआई आवेदनों को निरस्त किया जा सकेगा.
  10. व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने के लिए बड़े सार्वजनिक हित को साबित करना आवश्यक होगा.
  11. ई-मेल, ऑनलाइन और यूपीआई के माध्यम से किए गए आवेदन एवं भुगतान को वैध माना जाएगा.
  12. सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज की जा सकेगी.

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