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‘माझी लाडकी बहिन’ योजना पर जयंत पाटिल ने उठाए सवाल, कहा- 80 लाख अपात्र थीं तो 20 माह तक क्यों दिया लाभ?


महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन’ में सत्यापन प्रक्रिया के दौरान करीब 80 लाख महिलाओं को अपात्र पाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने मंगलवार को सरकार पर तीखा हमला बोला और जवाबदेही तय करने की मांग की.

20 महीने तक फर्जी लाभार्थियों को लाभ क्यों?

जयंत पाटिल ने सवाल उठाया कि, इस योजना में यदि 80 लाख लाभार्थी फर्जी थे, तो सरकार ने उन्हें पिछले 20 महीनों तक योजना का लाभ क्यों दिया? उन्होंने संदेह जताया हुए पूछा- यह सुनियोजित भ्रष्टाचार था? पाटिल ने आगे कहा- प्रति महिला 1,500 रुपये मासिक के हिसाब से इन 80 लाख अपात्र महिलाओं को लगभग 24,000 करोड़ रुपये वितरित किए गए. सरकार को बताना चाहिए कि इस भारी राशि के लिए कौन जिम्मेदार है? 

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चुनावी लाभ के लिए चलाया गया खेल?

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने योजना शुरू करते समय कोई ठोस सत्यापन व्यवस्था नहीं बनाई गई. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह योजना चुनावी फायदे के लिए बिना जांच के चलाई गई. जयंत पाटिल ने मांग की कि सरकार इस चूक की जिम्मेदारी तय करे और स्पष्ट करे कि इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थी अचानक अपात्र कैसे पाए गए?

सरकार का बचाव

उधर महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना बंद नहीं की जाएगी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सत्यापन के बाद भी 1.70 करोड़ पात्र महिलाओं को योजना का लाभ जारी रहेगा. सरकार का दावा है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपात्रों को हटाया गया है. वहीं विपक्षी दलों ने इसे “लापरवाही और भ्रष्टाचार” करार दिया है.

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