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‘मारी दी गई गोली’, पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर भड़की CPIM


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लालकिले की प्राचीर से अपने 13वें संबोधन में देश से नक्सलवाद के खात्मे का जिक्र किया. इस दौरान उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर विपक्ष ने पीएम पर निशाना साधा. प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियारी नक्सल के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन अब दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। सीपीआईएम (CPIM) के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि उनकी पार्टी नक्सलवाद का विरोध करती है, लेकिन सरकार पर माओवादियों से निपटने में कानून और संविधान का उल्लंघन करने का आरोप है.

हम नक्सलियों का समर्थन नहीं करते: CPIM 

उन्होंने कहा, ‘नक्सलवाद एक राजनीतिक दृष्टिकोण और विचारधारा है, जिससे हम पूरी तरह असहमत हैं. हम नक्सलियों के तौर-तरीकों का समर्थन नहीं करते. वे हथियार उठाते हैं और सामान्य लोकतांत्रिक राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेते.’ प्रधानमंत्री के भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘अब वे अर्बन नक्सली का जिक्र करते हैं. अब वो नक्सली मानसिकता वाले लोग कह रहे हैं. वे हमेशा विपक्ष के लोगों पर देश-विरोधी होने और पाकिस्तान चले जाने का आरोप लगाना चाहते हैं.

मोदी सरकार पर CPIM नेता का बड़ा आरोप

CPIM के महासचिव एमए बेबी ने मोदी सरकार पर राज्य प्रायोजित आतंकवाद का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार किए गए नक्सलियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश करने के बजाय, हिरासत में ही गोली मार दी गई. महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे सरकार पर दबाव डालें. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण मौजूदा सीटों में ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए, न कि इसे परिसीमन से जोड़ा जाए.

उन्होंने कहा, ‘हम सभी राजनीतिक पार्टियां प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि वे महिला आरक्षण पर दोहरा रवैया अपनाना बंद करें. हम मौजूदा सीटों में ही महिलाओं को तुरंत आरक्षण देने के पक्ष में हैं, लेकिन प्रधानमंत्री महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ रहे हैं. अगर सरकार इसे बिना परिसीमन के अलग से विधेयक के रूप में लाती है तो हम इसका पूरा समर्थन करेंगे.’



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