- सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर बम ब्लास्ट दोषी की जमानत ठुकराई।
- यह मामला आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है।
- दोषी को 2008 जयपुर ब्लास्ट में उम्रकैद मिली थी।
जयपुर बम ब्लास्ट केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ पप्पू को राहत देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने दो टूक कहा कि यह कोई साधारण जमानत का मामला नहीं, मामला आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है. कोर्ट ने दोषी पप्पू की जिंदा बम प्लांट करने के मामले में जमानत खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
2008 जयपुर सीरियल ब्लास्ट से जुड़ा है मामला
मामला 13 मई, 2008 के जयपुर सीरियल ब्लास्ट से जुड़ा है, जब शहर में अलग-अलग जगहों पर 9 बम लगाए गए थे. इनमें 8 बम फट गए थे, जबकि चांदपोल मार्केट में रखा 9वां बम फटने से पहले बरामद कर डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी जिंदा बम को प्लांट करने के मामले में सरवर आजमी को दोषी ठहराया गया. ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद दोषी को साल 2025 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद, जब दोषी को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली, तो सरवर आजमी ने फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया.
मामले में चार आतंकियों को सुनाई गई थी सजा
राजस्थान हाई कोई में जज रमेश कुमार जोशी की स्पेशल अदालत ने पिछले साल 4 अप्रैल, 2025 को 18 साल पुराने सीरियल बम ब्लास्ट मामले में मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ पप्पू के अलावा सैफुर रहमान, मोहम्मद कैफ और शाहबाज अहमद को दोषी ठहराया था. इसके बाद, स्पेशल कोर्ट ने चार दिन बाद 8 अप्रैल, 2025 को मामले में अपना फैसला सुनाते हुए चारों आतंकवादियों को उम्रकैद की सजा दी थी.
ऐसे अपराधियों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जा सकती- राजस्थान HC
राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने 600 पन्नों के दिए गए फैसले में इस मामले को बहुत ही गंभीर मुद्दा करार देते हुए आतंकवाद को समाज के लिए एक बहुत बड़ा खतरा कहा था. अदालत ने इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि ऐसे अपराधियों के प्रति किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती है.
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