गोरखपुर के बिछिया की रहने वाली मानसून सैलून की मैनेजर रत्ना सिंह ने 12 मई को लखनऊ में सुसाइड कर लिया था. मंगलवार 19 मई को गोरखपुर विश्वविद्यालय के समक्ष पंडित गोविंद बल्लभ पंत पार्क में उसे श्रद्धांजलि दी गई. श्रद्धांजलि सभा में मोमबत्ती जलाकर उसे श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया. परिवार और दोस्तों के बीच श्रद्धांजलि के दौरान उसकी दोनों बहनों सुप्रिया सिंह और प्रिया सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सख्ती पर आभार जताया.
हालांकि उन लोगों ने कहा कि आरोपियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए. उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाने वाले लोगों की ओर से परिवार को मामले को तूल नहीं देने की धमकी मिलने का आरोप लगाया और परिवार को उन लोगों से खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग भी की.
आरोपियों को फांसी की सजा की मांग
उन्होंने कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. उन्हें फांसी की सजा दी जाए, जिससे उनकी बहन रत्ना सिंह की तरह कोई दूसरी लड़की दरिंदों की प्रताड़ना का शिकार होकर आत्महत्या करने को मजबूर नहीं होने पाए. यह आत्महत्या नहीं है. आरोपियों द्वारा उनकी बहन को टार्चर कर जबरन आत्महत्या के लिए उकसाकर मौत के मुंह में धकेला गया है. उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करती है कि दोषियों को इतनी सख्त सजा मिले कि गोरखपुर जैसे छोटे टाउन एरिया से निकलकर बाहर सपना पालकर जाने वाली लड़कियों के साथ कभी ऐसा नहीं होने पाए.
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रत्ना सिंह के भाई वेदांत सिंह ने कहा कि उनकी बहन काफी जिंदादिल थी. वह सुसाइड नहीं कर सकती थी, लेकिन उसके सुसाइड करने से यह साफ हो गया है कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से काफी प्रताड़ित किया गया है. उन्होंने कहा कि परिवार पर इस मामले को तुलना नहीं देने का आरोपियों ने दबाव भी बनाया है. इसलिए उन्हें और उनके परिवार को अब डर भी सता रहा है. वह परिवार की सुरक्षा की मांग भी करते हैं.
उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो और उन्हें फांसी की सजा दी जाए, तभी उनकी बहन की आत्मा को शांति मिलेगी. रत्ना के सहपाठी शिवप्रसाद शुक्ला और नैना सिंह ने बताया कि उन लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा है कि इतनी जिंदा दिल लड़की अब उन लोगों के बीच में नहीं है. वह चाहते हैं कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए.
10 साल पहले लखनऊ गईं थीं रत्ना
रत्ना सिंह एक दशक पहले दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर दिल में कुछ बड़ा मुकाम हासिल करने की तमन्ना लेकर रत्ना सिंह लखनऊ गई थी. अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर वह मानसून सैलून के मैनेजर पद तक पहुंची. वह बीते एक दशक से भी अधिक समय से वह लखनऊ में रह रही थी. जिंदा दिल होने के साथ ही उसने कुछ मुकाम हासिल करने के तमाम सपने देखे थे. लेकिन 12 मई की देर रात उसने लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित फ्लैट में सुसाइड कर लिया.
सुसाइड के पहले उसने खुद द्वारा बनाए गए वीडियो में विरासत होटल और मानसून सैलून के ओनर शरद सिंह, उसकी पत्नी पल्लवी जोशी, शरद के सहयोगी प्रशांत शर्मा, मंगल यादव और वैशाली पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. सुसाइड करने से पहले उसने दो दोस्तों को फोन कर इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन जब तक पुलिस उसके फ्लैट तक पहुंची वो फांसी के फंदे पर लटक चुकी थी. दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकल गया और अस्पताल ले जाया गया.
जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया. लखनऊ पुलिस ने फरार आरोपियों के ऊपर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद हुई ताबड़तोड़ छापेमारी की वजह से सभी आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मुख्य आरोपी शरद सिंह के विरासत होटल और मानसून सैलून को सील कर दिया गया है. वही शरद सिंह के अवैध निर्माण पर भी एलडीए का बुलडोजर चल चुका है. उसकी तीन लग्जरी गाड़ियों को भी सीज किया जा चुका है.
