राहुल गांधी की मंगलवार को आलोचना करने के बाद, अचानक से एक दिन बाद बुधवार को एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके ने यूटर्न ले लिया है. अब यह आलोचना समर्थन में बदल गई है. डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा है कि अगर ऊंचे पद पर बैठे ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र विरोधी हैं, तो चुनाव निष्पक्ष कैसे हो सकते हैं?
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें हटाया जाना चाहिए. सरकार की तरफ से की जा रही गलतियों को खिलाफ लड़ना हर सिटिजन का अधिकार है. राहुल गांधी ने कल यही किया है, यह एकदम सही है. केंद्र सरकार नहीं चाहती कि राहुल गांधी उनके खिलाफ विरोध करें.
डीएमके का यह बयान ऐसे में हैरान करने वाला है, क्योंकि जिस दिन (6 अक्टूबर) दिल्ली में कांग्रेस प्रोटेस्ट को लीड करते हुए राहुल गांधी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, उसी दौरान डीएमके ने तमिलनाडु में एसआईआर को लेकर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए थे. राहुल गांधी ने अपने प्रोटेस्ट के दौरान मांग की थी कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन को रद्द किया जाए. चीफ इलेक्शन कमिश्नर को हटाया जाए.
डीएमके ने उठाए थे राहुल के रुख पर सवाल
इससे पहले डीएमके के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने एक्स पर पोस्ट करते हुए तमिलनाडु एसआईआर पर कांग्रेस की चुप्पी और राहुल के रुख पर सवाल उठाए थे. डीएमके का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तमिलनाडु की वोटर लिस्ट से लाखों वोटर्स के नाम हटा दिए गए. डीएमके ने इंडिया गठबंधन की उस मीटिंग से किनारा कर लिया था, जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई जानी थी.
हालांकि, यह संकेत दिए थे कि डीएमके विपक्ष के इस मकसद का समर्थन करती है. इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के साथ है. इधर, डीएमके की इस बयानबाजी पर कांग्रेस या राहुल गांधी ने किसी तरह का रिएक्शन नहीं दिया.
2026 के विस चुनाव परिणाम के बाद से बनी हुई है दूरी
दरअसल, दोनों राजनीतिक दल के बीच साल 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद से दशकों पुराना नाता टूट गया. कांग्रेस ने सत्ताधारी टीवीके को समर्थन दिया. इससे डीएमके और कांग्रेस के बीच एक दूरी बनी हुई है.
