आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी के मौके पर संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने देश में चल रहे प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि समस्या या शिकायत के इर्द-गिर्द विरोध प्रदर्शन के जरिए लोगों को इकट्ठा किया जा सकता है. लेकिन तब क्या, जब यही लोगों के बीच फूट डालने की वजह बन जाएं.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभिवक है. इनका मकसद समस्याओं को सुलझाना होना चाहिए. न कि समाज में दूरियां या फूट को बढ़ाना.
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है. चाहे वह आंदोलन का नेतृत्व करने वाले ग्रुप हों, या सरकार और प्रशासन हो, या फिर राजनीतिक नेता, किन विरोध प्रदर्शनों से समाज में नफरत या फूट पैदा न हो.
उन्होंने कहा कि हमारी भावनाएं कितनी ही तीव्र हों, संविधान और कानून के तहत हमारे कार्यों की कुछ सीमाएं हैं. इसके अलावा सभ्य सार्वजनिक आचरण के नियमों अनुसार भी हमारी बातचीत और व्यवहार की कुछ सीमाएं तय हैं. हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे काम इन सीमाओं के दायरे में ही रहें.
पश्चिमी देशों के हालात का किया जिक्र
भागवत ने पश्चिमी देशों के हालात का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भारत को कमजोर करने की कोशिश करने वाली ताकतें, देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने और यहां के घटनाक्रमों को प्रभावित करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं.
उन्होंने रिजीम चेंज वाले बयान का हवाला देते हुए कहा कि भारत के भीतर मौजूद वैसी ही ताकत आपसी मतभेदों का फायदा उठा सकती है. सामाजिक कलह-नफरत उन लोगों के हित को साध सकती है, जो देश को कमजोर करना चाहते हैं. उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान संयम बरतने की अपील भी की.
समाज के भीतर मनमुटाव या दुश्मनी पैदा न हो: भागवत
भागवत ने चेतावनी देते हुए भी कहा कि चुनावी नफा नुकसान और लोकप्रियता पाने की चाहत को इस बात पर असर नहीं डालने देना चाहिए, कि लोग उन समस्याओं पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं. हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वोट का लालच, सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक फायदे हमारे विवेक और सद्भावना पर हावी न हो जाएं.
प्रदर्शनकारियों और सत्ता में बैठे लोगों को किसी भी कदम से समाज के भीतर मनमुटाव या दुश्मनी पैदा नहीं करना चाहिए. चाहे समाज का कोई समूह आंदोलन कर रहा हो, हमें सुनिश्चित करना होगा कि हमारे कार्यों से एकजुट समाज में कोई मनमुटाव, नफरत, कड़वाहट या बंटवारा पैदा न हो.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि जब कोई आंदोलन किसी अन्य उद्देश्य से प्रेरित होता है, तो वह राजनीति का एक हथियार बन जाता है. इससे किसी व्यक्ति, समूह या विचारधारा के प्रति दुश्मनी बढ़ती है. भारत को कमजोर करने की कोशिश करने वाली ताकतें इसका फायदा उठाती हैं.
