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शिवाजी पार्क प्रोटेस्ट: केस दर्ज होने पर बोले अभिजीत दीपके – ‘हम भी…’


सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने शिवाजी पार्क केस में हुई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अधिक से अधिक मामले दर्ज करें, लेकिन हम अभी भी अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ते रहेंगे. 

दीपके बयान अभिजीत दीपके के खिलाफ केस दर्ज की खबरों के बीच आया है. दीपके ने कहा है, ‘युवाओं के नेतृत्व वाला यह आंदोलन लोकतंत्र बचाने की अपनी लड़ाई जारी रखेगा. चाहे औऱ केस दर्ज कर लें. लेकिन हम अपने लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे.’

मुंबई के स्थानीय निवासी ने की है शिकायत

मुंबई के एक स्थानीय निवास और वकील सिद्धि देवलेकर ने शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में सीजेपी के दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह के खिलाफ शिकायत की है. आरोप है कि इन्होंने इजाजत न मिलने के बावजूद शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया. 

वकील देवलेकर ने कहा है कि सीजेपी नेताओं दीपके, रांका, दास और रत्ना सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है. आरोप है कि इन्होंने साफ तौर पर मना होने के बाद भी विरोध प्रदर्शन किया और भारी भीड़ जुटाई.

सीजेपी ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में सीईसी के इस्तीफे की मांग

सीजेपी ने अपने प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. यह मांग कथित गड़बड़ियों से जुड़े खुलासे के बाद से की जा रही है. इस प्रदर्शन में कई नामी हस्तियां पहुंची थई, इनमें शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह, विशाल भारद्वाज और विशाल ददलानी जैसी हस्तियां भी शामिल हुई.

दीपके ने देर रात शुक्रवार को घोषणा की थी कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. इस दौरान उन्होंने बताया कि आंदोलन शांतिपूर्ण होगा. जो भी नागरिक निष्पक्ष चुनाव चाहता है, उसे शामिल होना चाहिए. इस दौरान उन्होंने जंतर-मंतर 2.0 की घोषणा की है. 

वहीं, सीजेपी नेता अंजिक्य शिंदे ने कहा है कि कुमार को इस्तीफा देना चाहिए. उनपर आपराधिक कार्रवाई होना चाहिए. साथ ही 2023 के कानून को रद्द करने और एसआईआर की वोटर लिस्ट को फ्रीज करने की मांग की है. 

मुंबई पुलिस ने नहीं दी थी प्रदर्शन की परमिशन

मुंबई पुलिस ने इस पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी. इसके पीछे कारण शोर शराबे से होने वाले पॉल्यूशन, ट्रैफिक जाम और इलाके में ट्रैफिक में रुकावट जैसी चिंताएं जताई थीं. इसके बाद जेल उन्होंने जेल भरो आंदोलन की घोषणा की. इस दौरान हजारों लोग शामिल हुए.



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