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शोपियां के ‘जामिया सिराज-उल-उलूम’ मदरसे पर बैन से बवाल, कश्मीर पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा


जम्मू-कश्मीर के शोपियां ज़िले के इमाम साहब स्थित ‘दारुल उलूम, जामिया सिराज-उल-उलूम’ पर प्रतिबंध (Ban) लगाए जाने के बाद घाटी में सियासी और सामाजिक सरगर्मी तेज़ हो गई है. एक तरफ राजनेता, शिक्षाविद और सामाजिक संगठन इस स्कूल में पढ़ने वाले 800 से ज़्यादा छात्रों के भविष्य का हवाला देकर बैन हटाने की मांग कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस कार्रवाई को पूरी तरह सही ठहराया है.

पुलिस ने गंभीर खुफिया और जांच रिपोर्ट (डोसियर) का हवाला देते हुए मदरसे के भीतर चल रहे कट्टरपंथ और आतंकवाद के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है.

‘कट्टरपंथ और आतंकियों की भर्ती का रहा है इतिहास- पुलिस

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि शोपियां ज़िला पुलिस द्वारा तैयार किए गए एक ठोस डोसियर के आधार पर की गई है. पुलिस के मुताबिक, विश्वसनीय सबूतों से यह साबित होता है कि इस स्कूल का कट्टरपंथ (Radicalization) फैलाने और आतंकवादियों की भर्ती करने में शामिल होने का एक लंबा इतिहास रहा है.

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17 पूर्व छात्र बने आतंकी, हुए ढेर

पुलिस ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए कहा, “इस संस्थान के 17 पूर्व छात्रों का ब्रेनवॉश किया गया. वे आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए थे और बाद में सुरक्षाबलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए. यह स्पष्ट रूप से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकवाद में धकेलने के एक लगातार पैटर्न को दर्शाता है.”

मारे गए आतंकियों के रिश्तेदारों का मदरसे पर कब्जा

सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर ऐसी खुफिया रिपोर्टें मिल रही थीं, जो बताती हैं कि इस संस्थान का माहौल गैर-कानूनी और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की पनाहगाह बन चुका था. पुलिस जांच में बैन के पीछे दो सबसे बड़े कारण सामने आए हैं: मारे गए कई खूंखार आतंकवादियों के करीबी रिश्तेदार ही जामिया सिराज-उल-उलूम के प्रबंधन में अहम पदों पर काबिज थे. प्रतिबंधित संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी’ के सदस्य कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए यहाँ छद्म तरीकों (Proxies) से काम कर रहे थे और गुपचुप तरीके से अपना देश-विरोधी एजेंडा चला रहे थे.

UAPA के तहत हुई कार्रवाई, प्रशासन ने दिया था जवाब का मौका

इन सभी ठोस सबूतों के आधार पर दारुल उलूम, जामिया सिराज-उल-उलूम के खिलाफ ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) की धारा 8 के तहत कार्रवाई शुरू की गई. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर ने संस्थान के प्रबंधन को एक नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर दिया था.

संस्थान के प्रबंधन ने अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं, जिनकी ज़िला पुलिस द्वारा रखे गए भौतिक सबूतों और खुफिया जानकारियों के साथ बारीकी से जांच की गई. गहन विचार-विमर्श और सबूतों के आधार पर, डिविज़नल कमिश्नर ने 24 अप्रैल के आदेश के माध्यम से अंततः इस संस्थान को गैर-कानूनी घोषित कर दिया.

अब देखना यह है कि प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद 800 छात्रों के भविष्य को लेकर राजनीतिक दल आगे क्या कदम उठाते हैं.

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