बिहार में मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब बीजेपी सम्राट चौधरी को सत्ता की कमान सौंपने जा रही है. 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी सीएम पद की शपथ लेंगे. सम्राट चौधरी कोइरी समुदाय से आने वाले बिहार के दूसरे मुख्यमंत्री होंगे. इससे पहले 1968 में सतीश प्रसाद सिंह इस समुदाय से मुख्यमंत्री बने थे, जिनका कार्यकाल मात्र पांच दिन का रहा था. नई सरकार में जेडीयू से दो डिप्टी सीएम हो सकते हैं.
ओबीसी वर्ग को बीजेपी ने साधा!
बिहार में कोइरी को कुशावाहा भी कहा जाता है. ओबीसी में यादव के बाद कुशवाहा दूसरी बड़ी जाति है. बीजेपी ने ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश की है. बिहार के साथ फोकस में यूपी भी है. सम्राट चौधरी, गैर यादव ओबीसी नेता के रूप में बीजेपी की पहली पसंद थे. वो RJD और JDU में रहने के बाद बीजेपी में शामिल हुए. उनके पास संगठन का लंबा अनुभव है, इसलिए भी बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया है.
नीतीश कुमार के साथ सम्राट चौधरी की केमिस्ट्री!
इसके अलावा सम्राट चौधरी आक्रामक और मुखर छवि के नेता हैं. डिप्टी सीएम बनने के बाद उन्होंने बिहार बीजेपी में नया जोश भरा है. यही नहीं नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम रहते हुए सम्राट चौधरी की केमिस्ट्री काफी अच्छी थी. माना जाता है कि उन्हें सीएम की कुर्सी पर बिठाने में नीतीश कुमार की भी भूमिका रही.
लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे सम्राट चौधरी
ये वही सम्राट चौधरी हैं, जिन्होंने बीजेपी में आने के बाद नीतीश कुमार के खिलाफ प्रतिज्ञा ली थी. प्रतिज्ञा ये कि वो जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे. आज नीतीश कुमार बिहार की सत्ता से बाहर हो चुके हैं और उनकी कुर्सी पर सम्राट चौधरी बैठने जा रहे हैं. सम्राट चौधरी ही बिहार में बीजेपी के ऐसे नेता हैं जो विपक्ष के निशाने पर सबसे ज्यादा रहे हैं.
सम्राट चौधरी को घेरती रही आरजेडी
आरजेडी उनकी डिग्री, बर्थ सर्टिफिकेट को फर्जी बताकर हमला करती रही है. आरजेडी ने बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त सम्राट चौधरी को जमकर घेरा था. अब जब वो सीएम बनने जा रहे हैं तो उनके चयन पर आरजेडी एक बार फिर सवाल उठा रही है. तेजस्वी यादव कह रहे हैं कि बिहार अब गुजरात से चलेगा तो उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा, ”मुख्यमंत्री बनाने के लिए बीजेपी को एक घुमंतू ही मिला’.
सम्राट चौधरी का सियासी सफर
अब नीतीश कुमार बिहार की सियासी पिक्चर से आउट हो चुके हैं और विपक्ष के सीधे टारगेट पर सम्राट चौधरी आ गए हैं. सम्राट चौधरी के सियासी सफर पर नजर डालें तो उनके पिता शकुनी चौधरी और मां पार्वती देवी भी राजनीति में रही हैं. सम्राट चौधरी ने 1999 में आरजेडी से सियासी करियर की शुरुआत की थी. 2000 में वो आरजेडी से विधायक बने और राबड़ी सरकार में मंत्री बने. 2014 में वो जेडीयू के पाले में चले गए. जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री रहे.
इसके बाद 2017 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया. साल 2023 में बिहार बीजेपी के अध्यक्ष बने. 2024 में उन्हें पहली बार नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया गया. 2025 के चुनाव के बाद गृहमंत्री बने. अब 15 अप्रैल 2026 को वो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं.
