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सोनम वांगचुक का अनशन जारी, अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से कर दी ये मांग


सोनम वांगचुक नीट की परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. इसे लेकर देश में राजनीति गरमाई हुई है. इस बीच AIMIM चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मांग की है कि सरकार सोनम वांगचुक की मांग पर गौर करे. वहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर हर दिन नजर रखें और जरूरत पड़ने पर उन्हें मेडिकल मदद दें.

ओवैसी ने सरकार से की ये मांग

सोनम वांगचुक को लेकर AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि जल्द-जल्द इस पर कोई बात हो और हम उम्मीद करते हैं कि उनकी सेहत अच्छी हो. हम भारत सरकार से मांग करते हैं कि सोनम वांगचुक साहब की मांगों पर संजीदगी से गौर करे.’ सोनम वांगचुक का वजन गुरुवार (16 जुलाई 2026) को नौ किलोग्राम से अधिक कम हो गया है और उनके डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से भूख हड़ताल करने के कारण वह गंभीर चरण में पहुंच गए हैं और इससे उनके अंगों पर असर पड़ना शुरू हो सकता है.

वांगचुक ने जारी किया वीडियो संदेश

वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर यह जानकारी उनके उस वीडियो संदेश के कुछ घंटों बाद आयी जो उन्होंने बुधवार देर रात जारी किया था. इस वीडियो संदेश में उन्होंने राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों की अपील के बावजूद अपनी भूख हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया और कहा कि सरकार की ओर से कोई जवाब मिले बिना इसे खत्म करने से गलत संदेश जाएगा. इसके बजाय उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च को मजबूत करने की अपील की. 

अपनी सेहत को लेकर वांगचुक ने वीडियो संदेश में कहा कि अब तक हुई मेडिकल जांच में तुरंत किसी भी तरह के खतरे का संकेत नहीं मिला है. उन्होंने कहा, ‘मेरी हालत ऐसी नहीं है कि मैं दो-चार दिन में मर जाऊंगा. कई मेडिकल जांच की गयी हैं और 18 दिन की भूख हड़ताल के हिसाब से नतीजे काफी सामान्य हैं. ईसीजी भी किया गया और वह भी ठीक है. मैं अभी कई और दिनों तक इसे जारी रख सकता हूं.’

सरकार से की गई बातचीत की अपील

किसान नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की है कि वह 16 जुलाई को शाम जंतर-मंतर पर वांगचुक से मिलने जाएंगे. संगीतकार विशाल ददलानी, अभिनेता सयाजी शिंदे, अभिनेता अतुल कुलकर्णी और लेखिका शोभा डे ने भी सरकार से कार्यकर्ता के साथ बातचीत करने की अपील की और उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता जताई.



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