NEET पेपर लीक की जवाबदेही, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और देश के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहे सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का आज (सोमवार, 20 जुलाई) को 23वां दिन है. सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने जानकारी दी थी कि उन्हें डॉक्टर्स की तरफ से कुछ भी खिलाया नहीं गया है, इसलिए उनका अनशन जारी है. हालांकि, आज कुछ शर्तों पर सोनम वांगचुक अपना अनशन खत्म कर सकते हैं. इस बीच आज ही संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शांतिपूर्ण संसद मार्च प्रस्तावित है. पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है और क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है. इसके बावजूद मार्च की तैयारी तेज है. अब यह देखना होगा कि आज दिल्ली में क्या होता है.
अभिजीत दिपके की CJP ने गाइडलाइंस जारी करते हुए मार्च में शामिल होने वालों से अपील की है कि इस मार्च में हिंसा की कोई जगह नहीं होगी. न किसी को गलत करना है और न ही गलत होने देना है. हालांकि, CJP ने पुलिस से इस मार्च की अनुमति नहीं मांगी थी. प्रस्तावित मार्च से एक दिन पहले (रविवार, 19 जुलाई) दिल्ली पुलिस ने यह जानकारी सार्वजनिक की थी कि नई दिल्ली जिले में, जंतर-मंतर रोड पर तय किए गए विरोध-प्रदर्शन स्थल को छोड़कर बाकी हर धारा 163 लागू की गई है. वहीं, संसद तक किसी प्रस्तावित मार्च के लिए न तो कोई परमिशन मांगी गई है और न ही पुलिस ने कोई अनुमति दी है. ऐसे में दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की थी कि वे किसी भी अनधिकृत सभा या मार्च में शामिल न हों और सुरक्षा और शांति बनाए रखने में दिल्ली पुलिस की मदद करें.
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धारा 163 का उल्लंघन करने वालों पर FIR की चेतावनी
दिल्ली पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि 20 जुलाई को संसद का सत्र शुरू हो रहा है इसलिए आम जनता और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. धारा 163 का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर धारा 223 और कानून के अन्य लागू प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा.
‘संसद चलो मार्च’ से पहले नहीं तोड़ूंगा अनशन- सोनम वांगचुक
संसद मार्च से पहले, सोमवार सुबह भी सोनम वांगचुक ने अस्पताल से एक संदेश जारी कर दावा किया है कि उनका अनशन ‘संसद चलो मार्च’ के बाद ही टूटेगा. इसके लिए उन्होंने तीन शर्तें भी रखी हैं. पहला, या तो सरकार खुद पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम में फेलियर की जिम्मेदारी ले. दूसरा, जब वह या सीजेपी समर्थक संसद के दरवाजे तक पहुंचें और वहां सांसद उन्हें इस बात का आश्वासन दें कि मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था के बारे में गंभीरता से बात की जाएगी. और तीसरा, अगर उनकी सेहत की वजह से वह मार्च जॉइन नहीं कर पाते हैं तो जिम्मेदार सांसद उनके पास अस्पताल आएं और उन्हें इस बात का आश्वासन दें, तभी सोनम अपना अनशन खत्म करेंगे.
कैसी है सोनम वांगचुक की तबीयत?
लोकप्रिय साइंटिस्ट और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं. अनशन के 21वें दिन उनकी बिगड़ती तबीयत का हवाला देकर सोनम वांगचुक को उनकी मर्जी के बिना जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल ले जाया गया था. सोनम ने इसे ‘गैरकानूनी हिरासत’ बताया था और कहा था कि वह बेहतर महसूस कर रहे थे और उन्हें अस्पताल की जरूरत नहीं थी. सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने भी दावा किया था कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं है और वह सोनम को किसी प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट कराना चाहती हैं लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी यह याचिका खारिज कर दी थी.
वहीं, अस्पताल के डॉक्टर्स ने जानकारी दी कि सोनम के वाइटल्स स्थिर हैं, लेकिन इतने दिनों से भूखे रहने की वजह से उनका शरीर कमजोर हो गया है. रविवार (19 जुलाई) की रात तक जारी हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक, सोनम वांगचुक की हालत स्थिर है. हालांकि, यह कहा गया है कि लंबे समय से जारी अनशन के कारण शरीर पर पड़े प्रभावों को देखते हुए उन्हें 24 घंटे चिकित्सकीय देखरेख में रखना होगा. वांगचुक के सभी महत्वपूर्ण शारीरिक मानक स्थिर हैं और उनके ब्लड प्रेशर में भी मामूली सुधार दर्ज किया गया है.
सोनम वांगचुक की देखरेख सफदरजंग अस्पताल और AIIMS के विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम कर रही है. डॉक्टर्स का मानना है कि किसी भी कॉमप्लिकेशन का समय रहते पता लगाने और उसका इलाज तुरंत करने के लिए सोनम का लगातार डॉक्टर्स की निगरानी में रहना जरूरी है.
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