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स्वतंत्र भारद्वाज से पुलिस ने पूछे 100 से ज्यादा सवाल, क्या वायरल वीडियो खोलेंगे राज?


दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में गिरफ्तार हिंदूवादी इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज से पुलिस ने हिरासत के दौरान कई घंटे पूछताछ की. अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमों ने उसे उसके वायरल वीडियो दिखाए और उनमें किए गए दावों को लेकर सवाल किए. भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था. इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया और शनिवार को दिल्ली की एक अदालत ने उसे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

100 से ज्यादा सवाल पूछे गए

पुलिस के मुताबिक, 22 वर्षीय स्वतंत्र भारद्वाज से हिरासत के दौरान 100 से अधिक सवाल पूछे गए. भारद्वाज ने कुछ सवालों के जवाब दिए, जबकि कई सवालों का उसने जवाब नहीं दिया. जांच टीम ने पूछताछ के दौरान उसके कई वायरल वीडियो भी सामने रखे. इन वीडियो में भारद्वाज ने जो बयान दिए और जो दावे किए, पुलिस ने उन्हें लेकर उससे सवाल-जवाब किया.

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सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के दौरान भारद्वाज में अपने कृत्य को लेकर कोई पछतावा नहीं दिखा. पुलिस अब उसके बयानों और सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री को जांच का हिस्सा बना रही है.

वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला एक वीडियो पॉडकास्ट के बाद सुर्खियों में आया. इसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर दावा किया था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उसने नाबालिग छात्र कार्यकर्ता के पिता की ‘‘खोपड़ी फोड़ दी’’ थी. हालांकि, बाद में उसने दावा किया कि उसने यह सब आत्मरक्षा में किया था.

दिल्ली पुलिस ने इससे पहले कहा था कि छात्र कार्यकर्ता के पिता को लगी चोटें साधारण प्रकृति की थीं. अब पुलिस वायरल वीडियो और दूसरे डिजिटल सबूतों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था.

FIR में SC/ST एक्ट और धमकी की धाराएं जुड़ीं

भारद्वाज के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में दिल्ली पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धाराएं और आपराधिक धमकी का आरोप भी जोड़ा है. यह कार्रवाई भारद्वाज की गिरफ्तारी से एक दिन पहले की गई थी.

इसके अलावा नाबालिग छात्र कार्यकर्ता की शिकायत पर पॉक्सो अधिनियम के तहत अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है. छात्रा का आरोप है कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उसे ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.

स्वतंत्र भारद्वाज को शनिवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालर के आवास पर दोपहर करीब दो बजे पेश किया गया. कानूनी सहायता के लिए नियुक्त वकील वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत के सामने पेश हुआ. सुनवाई के बाद अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान भारद्वाज के सोशल मीडिया पोस्ट, वायरल वीडियो और दूसरी डिजिटल सामग्री की भी पड़ताल की जा रही है. जांचकर्ता इन सामग्री को मामले से जोड़कर देख रहे हैं.

समर्थकों ने थाने के बाहर किया प्रदर्शन

भारद्वाज की गिरफ्तारी के बाद उसके कई समर्थक शनिवार को संसद मार्ग थाने के बाहर पहुंचे. समर्थकों ने उसके खिलाफ दर्ज मामला वापस लेने और निष्पक्ष जांच की मांग की.

वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों से मिला.

प्रतिनिधिमंडल ने भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्राथमिकी में हत्या के प्रयास और आपराधिक धमकी के आरोपों के साथ एससी/एसटी अधिनियम की धाराएं जोड़ने की मांग की थी.

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छात्रा के खिलाफ भी पुलिस में शिकायत

इस मामले में एक और घटनाक्रम सामने आया है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने नाबालिग छात्र कार्यकर्ता के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि छात्रा ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट के जरिए हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया.

अधिकारी ने बताया कि इस शिकायत के आधार पर अभी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है. फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों और उपलब्ध डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है.



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