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हिमाचल: ‘हार के डर से चुनाव से भाग रहे थे CM, कांग्रेस का…’, जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर हमला


हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के परिणामों को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर जोरदार हमला बोला है. जयराम ठाकुर ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री को चुनाव के परिणाम पहले से पता थे, इसी डर के कारण वह चुनाव से भाग रहे थे और इसे टालने की हर संभव कोशिश कर रहे थे. इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में ‘कार्यवाहक’ मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए.

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री की कोई भी कुटिल चाल कामयाब नहीं हुई और माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उन्हें मजबूरन चुनाव करवाने पड़े. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं और मतदाताओं को लुभाने के हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन जनता के सामने मुख्यमंत्री का झूठ बेनकाब हो चुका है.

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CM के अपने हलके में कांग्रेस को मिली मात

पूर्व सीएम ने चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनावों में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार हुई है और उसका सूपड़ा साफ हो गया है. मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों तक को उनके अपने हलके और पंचायतों में जनता ने नकार दिया है. जिला पंचायत चुनाव में खुद मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों ने कांग्रेस से ज्यादा वोट हासिल किए हैं. नगर निगम, जिला पंचायत और ब्लॉक समिति चुनावों में प्रदेश के लोगों ने भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को 60% से अधिक वोट देकर अपना आशीर्वाद दिया है.

जयराम ठाकुर ने इस प्रचंड जनादेश के लिए प्रदेशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और नेतृत्व में अपना पूरा भरोसा जताया है. उन्होंने सीएम को नसीहत देते हुए कहा कि अब झूठ का सहारा लेना छोड़ दें और ईमानदारी से प्रदेश हित में काम करें.

‘मित्र मंडली स्थायी और व्यवस्था अस्थायी’

जयराम ठाकुर ने राज्य प्रशासन में ‘कार्यवाहकों’ (Acting) के सहारे चल रही व्यवस्था पर भी कड़ा प्रहार किया. प्रदेश में एक बार फिर से कार्यवाहक मुख्य सचिव (Acting CS) की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “आखिर मुख्यमंत्री में इतनी असुरक्षा और अविश्वास की भावना क्यों है? वे स्थायी मुख्य सचिव की नियुक्ति से क्यों कतरा रहे हैं? व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर यह कैसा मजाक है? इससे पहले भी 8 महीने तक मुख्य सचिव को कार्यवाहक रखा गया और रिटायरमेंट के मात्र 4 दिन पहले स्थायी नियुक्ति दी गई. एक डीजी (DG) स्तर के अधिकारी को रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले कार्यवाहक डीजीपी बनाकर छुट्टी पर भेज दिया गया.”

नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी ‘मित्र मंडली’ को तो स्थायी कर दिया है, लेकिन प्रदेश के हितों और प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थायी (कार्यवाहक) छोड़ दिया है. क्या प्रदेश को कार्यवाहकों के भरोसे चलाना ही मुख्यमंत्री का ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का मॉडल है?

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