दिल्ली हाई कोर्ट में कथित शराब नीति घोटाले को लेकर सियासी और कानूनी टकराव अब खुलकर सामने आ गया है. मंगलवार (05 मई) को सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने साफ संकेत दिया कि अदालत इस मामले को रुकने नहीं देगी, भले ही आरोपी नेता कार्यवाही का बहिष्कार क्यों न करें. कोर्ट ने कहा कि वह तीन वरिष्ठ वकीलों को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त करेगी, जो अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक का पक्ष रखेंगे.
केजरीवाल और सिसोदिया के लिए नियुक्त होंगे एमिकस क्यूरी
यह पूरा विवाद तब और तेज हो गया जब इन नेताओं ने जज के खिलाफ पक्षपात की आशंका जताते हुए सुनवाई से खुद को अलग कर लिया. हालांकि अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया और साफ कहा कि न्यायिक प्रक्रिया किसी के बहिष्कार से नहीं रुकेगी. जस्टिस शर्मा ने कहा पहले एमिकस क्यूरी नियुक्त होंगे उसके बाद ही आगे की सुनवाई शुरू होगी.
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निचली अदालत ने सभी 23 आरोपियों को किया था आरोप मुक्त
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को सभी 23 आरोपियों को राहत देते हुए केस से डिस्चार्ज कर दिया था और जांच पर सवाल उठाए थे. इसी फैसले को चुनौती देते हुए सीबीआई हाई कोर्ट पहुंची है. दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ था. आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया. हालांकि आम आदमी पार्टी इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है.
अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाते हुए हितों के टकराव और जज पर पक्षपात करने की आशंका जताई थी. पिछले हफ्ते पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को चिट्ठी लिखकर कहा था कि वे उनके समक्ष व्यक्तिगत तौर से या किसी वकील के माध्यम से पेश नहीं होंगे, और इसके बजाय वे महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग का अनुसरण करेंगे.
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