बड़े सितारे, बड़ा बजट, बड़ा प्लेटफॉर्म, बड़ी लोकेशन्स इस बात की गारंटी नहीं होते कि कंटेंट भी बड़ा होगा. सिटाडेल के सीजन 2 में दिलचस्पी इसलिए थी कि इसमें हमारी देसी गर्ल प्रियंका चोपड़ा हैं और इसका पहला सीजन बढ़िया था, लेकिन सेकेंड सीजन के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता. सेकेंड सीजन में ऊपर ऊपर से सबकुछ है लेकिन वो नहीं है जो आजकल सबसे ज्यादा जरूरी है. कहानी और कंटेंट. स्टाइल खूब है लेकिन सब्सटेंस नहीं है और इसलिए ये सीजन आपको जमकर बोर करता है.
कहानी
ये सीजन वहीं से शुरू होता है जहां पहला सीजन खत्म हुआ था. सिटाडेल के पुराने एजेंट्स Mason, Nadia और Bernard दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग हालात में जिंदगी जा रहे हैं. नाडिया और मेसन अलग हो चुके हैं लेकिन इन्हें फिर एक मिशन के लिए मिलना पड़ता है. हर हॉलीवुड फिल्म की तरह दुनिया इस बार फिर से खतरे में है Paulo Braga नाम का हैवान. वो एक ऐसी तकनीक बना रहा है जो इंसान के दिमाग को अपने कब्जे में लेकर उसे हैवान बना देगी.
फिर इसकी मदद से वो रशियन प्रेजीडेंट को मरवाना चाहता है. अब ऐसा करके वो क्या हासिल करेगा और दुनिया इससे कैसे खतरे में आएगी. ये लोग इस खतरे को टाल पाएंगे. साथ-साथ इनकी अपनी जिंदगी में क्या होगा. यही कहानी इस बार शो में दिखाई गई है.
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कैसी है ये सीरीज
ये सीरीज दुनिया के टॉप एजेंट्स के बारे में है लेकिन इस सीरीज में वो थ्रिल मिलता ही नहीं. पहले के दो एपिसोड में तो समझ नहीं आता हो क्या रहा है. कहानी मुद्दे पर आती ही नहीं, यहां वहां की चीजें दिखाई जाती हैं जो बोर करती है. तीसरे एपिसोड में कहानी समझ में आती है लेकिन एक ही एपिसोड बाद फिर सीरीज बोरिंग लगने लगती है.
इनकी पर्सनल लाइफ की चीजें इतनी ज्यादा दिखा दी गई हैं और वो इतनी खींचती हैं कि आप पक जाते हैं. छठे एपिसोड में एक ऐसा लव ट्राएंगल दिखा देते हैं कि आपको हंसी आ जाती है, स्क्रीनप्ले में काफी दिक्कत है. कुछ चीजें ठीक से नहीं समझ आती. आप एक्शन देना चाहते हैं. सस्पेंस देखना चाहते हैं लेकिन इस बार वो कम है. आपको एक बार को लगता है कि ये लोग क्या दिखाना चाहते हैं. क्यों बनाई गई ये सीरीज, आप किसी किरदार से कनेक्ट नहीं होते. ना ही आपको ये सारा स्टाइल देखने में मजा आता है क्योंकि ये सब अब हम हर दूसरी फिल्म और सीरीज में देख लेते हैं.
दुनियाभर की लोकेशन्स देखने में भी कोई खास मजा नहीं आता. प्रियंका और उनके पति के बीच के ट्रैक से आप इमोशनली कनेक्ट नहीं करते. किसी भी किरदार की बैक स्टोरी से आप नहीं जुड़ते. इस तरह की सीरीज से उम्मीदें काफी ज्यादा होती हैं और ये सीरीज उन उम्मीदों पर बिल्कुल खरी नहीं उतरती. ऊपर से प्राइम वीडियो पर आने वाले ऐड और फास्ट फॉरवर्ड बटन का ना होना आपको और गुस्सा दिलाता है. अंत में डायलॉग आता है, एक कप कॉफी हो जाए, और तब तक आपको कॉफी की सख्त जरुरत पड़ चुकी होती है.
एक्टिंग
Mason Kane ने बढ़िया काम किया है. वो इस किरदार में अच्छे लगते हैं और अपना काम बखूबी करते हैं. प्रियंका चोपड़ा ने कमाल का काम किया है. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मैजिकल लगती है. उनका एक्शन कमाल का लगता है. उन्हें देखकर लगता है कि वो हॉलीवुड में अपनी एक अलग जगह बना चुकी हैं. और ये जगह काफी मजबूत हो चुकी है. Bernard Orlick काफी अच्छे लगते हैं और इस किरदार को उन्होंने अच्छे से निभाया है.
वही इन सबको मिशन के लिए फिर से इकट्ठा करते हैं और उनमें वो कमांड नजर आती है. इसके अलावा बाकी के एक्टर्स भी परफेक्ट हैं. Lesley Manville ने कमाल का किरदार निभाया है. 70 साल की ये एक्ट्रेस पर्दे पर वो करने की कोशिश करती है जो बाकी ठीक से नहीं कर पाते. Matt Berry ने बड़ा अच्छा कॉमिक किरदार निभाया है. वो एक लाइट और फन एलिमेंट लेकर आते हैं.
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राइटिंग और डायरेक्शन
इस शो को Russo Brothers ने बनाया है. राइटिंग में ऐसा कुछ नया नहीं है जो आपको हैरान कर दे. या जो आपने पहले कभी नहीं देखा है. एजेंट्स वाली कहानियों में जो होता है. इसमें वही है बल्कि उससे भी कम ही है. डायरेक्शन ठीक है लेकिन शो में थ्रिल की कमी इसे बोरिंग बना देती है.
कुल मिलाकर टाइम पास के लिए देखना चाहें तो देख सकते हैं.
रेटिंग- 2 स्टार्स
