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हवाई किराए में बेहिसाब बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, केंद्र से जवाब मांगते हुए कहा- यात्रियों के बारे में करिए विचार


त्योहारों और छुट्टियों के दौरान निजी एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसे यात्रियों का ‘शोषण’ कहते हुए केंद्र सरकार और डायरेक्टरेट ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से जवाब तलब किया है.

बेलगाम हवाई किराए को लेकर एस लक्ष्मीनारायण नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय कर रही हैं. अक्सर किराया काफी महंगा होता है. लोगों को इसका कारण पता नहीं चल पाता. टिकट की कीमत को लेकर स्पष्ट नियम होने चाहिए. याचिका में किराए की अधिकतम सीमा तय करने, यात्रियों के मुफ्त चेक इन सामान का वजन दोबारा 25 किलोग्राम करने जैसी मांगें भी की गई हैं.

शुक्रवार, 15 मई को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किराए में भारी अंतर पर सवाल उठाए. जजों ने कहा कि कई बार एक एयरलाइन उसी सेक्टर के लिए 8,000 रुपये ले रही होती है, जबकि दूसरी 18,000 रुपये.

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केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि ‘भारतीय वायुयान कानून, 2024’ लागू हो चुका है. उसके आधार पर नए नियम बनाए जा रहे हैं. इस पर याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नए नियम बनने तक DGCA 1937 के नियमों के तहत किराए पर अंकुश लगा सकता है, लेकिन वह अपने इस अधिकार का उपयोग नहीं कर रहा.

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केंद्र सरकार को नए नियम बनाने के लिए समय देते हुए कोर्ट ने 13 जुलाई को सुनवाई की बात कही. इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि छुट्टियों के दौरान हवाई किराए में 300 से 500 प्रतिशत तक उछाल आता है, यह आम नागरिकों के ‘आवागमन के अधिकार’ का उल्लंघन है इसलिए, कोर्ट को गर्मी की छुट्टियों से पहले इस मामले में आदेश देना चाहिए. इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि त्योहारों पर वकीलों की फीस भी 400 प्रतिशत बढ़ जाती है.



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