व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिनियम पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं. यह बयान अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेनटेटिव द्वारा इस विधेयक को मंजूरी दिए जाने के एक दिन बाद आया है.
इस विधेयक में मॉस्को के शीर्ष ऊर्जा खरीदारों पर भारी शुल्क लगाने का भी प्रावधान है. विधेयक को सदन से पास होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास हस्ताक्षर के लिए भेज गया है. इसे कानून में बदलने के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया है कि ‘अमेरिकी राष्ट्रपति इस विधेयक पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं.’
भारत को इससे क्या होगा नुकसान?
इस कानून के लागू हो जाने के बाद भारत के लिए रूस से तेल लेना महंगा सौदा पड़ सकता है. भारतीय निर्यातित वस्तुओं पर अमेरिका बड़ा टैरिफ जोड़ सकता है, जिससे भारत को अमेरिका से व्यापार में एक बार फिर से भारी घाटा उठाना पड़ सकता है.
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भारतीय विदेश मंत्रालय का पक्ष
भारत के विदेश मंत्रालय ने रूस पर प्रतिबंध संबंधी अमेरिकी विधेयक पारित होने पर प्रतिक्रिया दी है. मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. हम विविध स्रोतों से ऊर्जा खरीद जारी रखेंगे. मंत्रालय ने यह भी कहा कि पिछले कुछ महीनों से लगातार हम इन मुद्दों पर अमेरिकी उच्चाधिकारियों से बात कर रहे हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि “हमने न केवल आपसी संबंधों बल्कि, इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में होने वाली उथल-पुथल और महंगाई की ओर अमेरिकी अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया है.”
उनका कहना है कि ‘हमने हमारे आर्थिक और व्यापारिक हितों को ध्यान रखते हुए जरूरी कदम उठाना शुरू कर दिया है. भारत सरकार अपने व्यापारियों को हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है.’
Input By : PTI(भाषा)
