उत्तर प्रदेश के 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों लेकर अभी से सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (AIMJ) के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सपा अब वो पार्टी नहीं रही जो कभी मुस्लिमों के बारे में सोचती थी. उसपर अब भरोसा न करें.
उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वो अब सपा की बजाए दूसरा कोई मजबूत विकल्प तलाशें और उसे मजबूती से समर्थन दें. इस बयान से यूपी की राजनीति में हलचल तेज हो गई हैं, लेकिन अभी तक इसपर सपा की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिली है.
#WATCH | Lucknow | President of All India Muslim Jamaat, Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi, says, “The 2027 Uttar Pradesh Assembly elections hold immense significance… I have appealed to my community, which has consistently voted for and supported the Samajwadi Party from 1990… pic.twitter.com/wwsZMEzhjo
— ANI (@ANI) May 16, 2026
मौलाना शहाबुद्दीन ने क्या कहा?
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा, “उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव बहुत अहमियत रखते हैं. ऐसे हालात में जब पूरे मुल्क में सियासी हलचल बदल गया है, खासकर मुस्लिम सांसदों के लिए मंजरनामा एकदम पलट चुका है. इसलिए मैनें अपनी कौम से अपील की है, जिसने 1990 से लेकर आज तक लगातार समाजवादी पार्टी को अपना वोट और समर्थन दिया है. अखिलेश यादव ने जबसे समाजवादी पार्टी की कमान संभाली है, तब से पार्टी का चेहरा, मोहरा और नजरिया सब बदल चुका है.”
मौलाना शहाबुद्दीन ने की खास अपील
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने आगे कहा, “मुलायम सिंह मुस्लिम समुदाय के हमदर्द थे, लेकिन अखिलेश यादव सहानुभूति नहीं रखते हैं. आखिर कब तक मुस्लिम समुदाय सपा का जनाजा लेकर घूमता रहेगा इसलिए मैंने अपने समुदाय से आग्रह किया है कि वे इस मामले पर गहराई से सोचें और ठीक से विचार करने के बाद समाजवादी पार्टी के अलावा किसी और विकल्प की तलाश करें. कौन सा विकल्प मजबूत हो सकता है उस विकल्प का विशलेषण करें और फिर आने वाले चुनाव में मजबूती के साथ वोट करें.”
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा- सपा पर अब भरोसा न करें
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मुसलमानों को अब सपा पर भरोसा करने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि अखिलेश मुसलमानों के मुद्दों से बचते रहे हैं. अखिलेश यादव ने ज्ञानवापी मस्जिद काशी पर कुछ नहीं बोला, मथुरा की शाही मस्जिद और कई अन्य मामलों जैसे मुद्दों पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, इसलिए, मैं मुसलमानों को कहूंगा कि उन पर भरोसा करने की कोई जरूरत नहीं है. कोई दूसरा विकल्प तलाशें.
इस बयान को अब ध्रुवीकरण की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि अगर मुस्लिम वोटों पर इस अपील का प्रभाव पड़ा तो इसका सीधा असर 2027 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है. यह पार्टी के पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) फॉर्मूले को झटका दे सकता है, जिसके बल पर सपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में अपना दबदबा दिखाया था. हालांकि, राजनीति में इस तरह की बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन ये देखना दिलचस्प होगा की सपा इसपर कैसी प्रतिक्रिया देती है.
ब्राह्मणों पर सपा नेता राजकुमार भाटी के बयान पर भड़कीं मायावती, कहा- माफी मांगे अखिलेश यादव
