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17वीं बार इबोला के प्रकोप से जूझ रहा सेंट्रल अफ्रीका का देश कांगो, 350 से ज्यादा संदिग्ध मामले और 91 की मौत


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  • डीआर कांगो के इतुरी प्रांत में इबोला का नया प्रकोप।
  • बढ़ते मरीजों के लिए बुनिया में नए उपचार केंद्र बने।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने 59 सक्रिय मरीजों के इलाज की पुष्टि की।
  • WHO ने केन्या से और उपकरणों का इंतज़ाम किया।

मध्य अफ्रीका का देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) एक बार फिर से इबोला वायरस के संक्रमण के प्रकोप से जूझ रहा है. कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि इस बार इबोला प्रकोप का केंद्र इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया है, जहां प्रभावित लोगों के इलाज के लिए नए उपचार केंद्रों को स्थापित किया गया है. अधिकारियों ने कहा कि इन केंद्रों का उद्देश्य बढ़ती संख्या में मरीजों को संभाल रहे अस्पतालों पर दबाव को कम करना है.

कांगो के स्वास्थ्य मंत्री ने हालात की दी जानकारी

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, डीआर कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रौजर कंबा ने रविवार (17 मई, 2026) को न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में कहा, ‘आज सुबह हम सभी टेंट लेकर आए हैं, ताकि उपचार केंद्रों को स्थापित किया जा सके. हमें पता है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल पहले से ही दबाव में हैं. मैं यहां की जनता को बताना चाहता हूं कि इस वक्त 59 मरीजों का सक्रिय रूप से इलाज चल रहा है, लेकिन हम फिर भी ट्रीटमेंट सेंटर्स को तैयार कर रहे हैं, ताकि अपनी क्षमताओं को और ज्यादा बढ़ा सकें.’

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि क्या कहा?

डीआर कांगो में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रतिनिधि ऐन एंसिया ने कहा, ‘यह उपकरण शुरुआती प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं और ये पर्याप्त नहीं होंगे. हमने किंशासा में मौजूद अपना पूरा स्टॉक खाली करके कांगो भेज दिया है. अब हम एक सी-130 कार्गो विमान तैयार कर रहे हैं, जो इस वक्त केन्या की राजधानी नाइरोबी में है. वहां हमारे डिपो में इसे लोड किया जा रहा है. इसके बाद यह किंशासा जाएगा और वहां और अधिक उपकरणों को पहुंचाएगा.’

2018-20 में वायरस से 2300 लोगों की हुई थी मौत

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, डीआर कांगो को इबोला से निपटने का काफी ज्यादा अनुभव है, क्योंकि यह देश में वायरस का अब तक का 17वां प्रकोप है. इबोला की पहली बार पहचान साल 1976 में कांगो में ही हुई थी और माना जाता है कि यह चमगादड़ों से फैला था. देश ने 2018 से 2020 के बीच इस वायरस का सबसे भयानक प्रकोप देखा था, जिसमें करीब 2,300 लोगों की मौत हुई थी.

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