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जम्मू-कश्मीर में फिर गुपकार गठबंधन की चर्चा, महबूबा मुफ्ती बोलीं, ‘अब फिर से उसी तरह का…’


जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर “गुपकार गठबंधन” की चर्चा तेज हो गई है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होकर जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और राजनीतिक रियायतों के लिए साथ आने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अब फिर से उसी तरह का गठबंधन बनाने का समय आ गया है, जैसा 2019 में पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (PAGD) के रूप में बनाया गया था.

पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि 2019 में PAGD के गठन ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर की पार्टियों को बातचीत के लिए बुलाने पर मजबूर किया था. उन्होंने कहा कि अब एक बार फिर सभी दलों को चुनावी राजनीति से ऊपर उठकर लोगों के हित में साथ आना चाहिए.

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महबूबा मुफ्ती ने कहा, “मैं सत्ताधारी सरकार समेत सभी पार्टियों को बुलाना चाहती हूं कि वे चुनावी राजनीति को भूलकर जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक साथ आएं और इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करें.”

लद्दाख मॉडल का दिया उदाहरण

महबूबा मुफ्ती ने लद्दाख के नेताओं की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि वहां के नेतृत्व ने धार्मिक और क्षेत्रीय मतभेदों से ऊपर उठकर लोगों के भविष्य को सुरक्षित करने का काम किया है. उन्होंने कहा कि लद्दाख के नेताओं ने एकजुट होकर अपनी लड़ाई लड़ी और सफलता हासिल की.

उन्होंने कहा, “लद्दाख का नेतृत्व चुनावी राजनीति से ऊपर उठा और लड़ाई जीत ली. हम सभी को PAGD की तरह एक साथ आना चाहिए और लोगों के अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए.”

नेशनल कॉन्फ्रेंस को नहीं ठहराया जिम्मेदार

महबूबा मुफ्ती ने PAGD के टूटने के लिए किसी एक पार्टी को जिम्मेदार नहीं ठहराया. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास लोगों का बड़ा समर्थन है और उसे सिर्फ सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.

उन्होंने कहा, “कोई भी सरकार लोगों को सड़कें, पुल और बिजली तो देगी ही, लेकिन जब तक लोग शांति के फ़ायदे नहीं उठा पाएंगे, तब तक कोई स्थायी शांति हासिल नहीं हो पाएगी.”

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केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग

महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर में बातचीत की प्रक्रिया फिर शुरू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि लोगों तक शांति का फायदा पहुंचाने के लिए राजनीतिक संवाद जरूरी है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है, तो यहां बातचीत की भाषा के तौर पर सिर्फ़ UAPA और PSA का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?”



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