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‘अगर आप हाथ-पैर काटते हैं, तभी…’, अपराधों से निपटने के लिए हाई कोर्ट ने की मुस्लिम देशों जैसी सजा की वकालत


कर्नाटक हाई कोर्ट ने मिडिल ईस्ट की तरह सख्त सजा देने की वकालत की है. अदालत ने कहा कि कि लोग डेमोक्रेटिक सिस्टम के तहत मिलने वाले अधिकारों और आजादी का तेजी से फायदा उठा रहे हैं. जस्टिस आर नटराज की यह टिप्पणी रेप के आरोपी 23 साल के एक युवक की जमानत याचिका खारिज करते हुए की. 

जज ने कहा कि मौजूदा कानूनों के तहत अपराधियों से सख्ती से निपटा नहीं जा रहा है, जिससे सजा का रोकने वाला असर कमजोर हो गया है.

डेमोक्रेसी की वजह से लोग कानून को हल्के में लेते हैं: HC

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा, ‘कानून ने अपनी ताकत खो दी है क्योंकि हम अपराधियों से सख्ती से नहीं निपटते. इसीलिए मिडिल-ईस्ट के उलट अपराध करना इतना आसान हो गया है. अगर आप हाथ या पैर काट देंगे, तभी शायद लोगों को कानून मानना ​​समझ आएगा क्योंकि हमारे यहां डेमोक्रेसी है, इसलिए हर कोई इसे हल्के में लेता है.’

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23 साल का छात्र है आरोपी

हाई कोर्ट ने 23 साल के युवक की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई आठ जून तक टाल दी. आरोपी की तरफ से पेश वकील अयंतिका मंडल ने दलील दी कि उनका क्लाइंट करीब दो महीने से ज्यूडिशियल कस्टडी में है और कोई जुर्म नहीं हुआ है.

आरोपी की क्लासमेट ने ही लगाया आरोप

मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 23 साल के स्टूडेंट पर उसकी एक क्लासमेट ने उसकी मर्जी के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया है. शिकायत के मुताबिक, दोनों कुछ समय तक रिलेशनशिप में थे, लेकिन बाद में महिला ने उसके कैरेक्टर पर शक होने के बाद उससे दूरी बना ली.

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