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‘दाचीगाम बैठक’ को लेकर बीजेपी नेता सुनील शर्मा का सीएम उमर अब्दुल्ला पर निशाना, कहा- ‘जमीन खिसकने का डर…’


जम्मू-कश्मीर के विपक्ष के नेता और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने ‘दाचीगाम बैठक’ को लेकर उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कोई बैठक नहीं, बल्कि एक ‘फ्लोर टेस्ट’ (शक्ति परीक्षण) है, क्योंकि उमर अब्दुल्ला को अपने पैरों के नीचे से जमीन खिसकने का डर सता रहा है.

उन्होंने उमर अब्दुल्ला की आलोचना करते हुए कहा कि वे जम्मू-कश्मीर की जनता से जुड़े असली मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं, और इसके बजाय लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए विधायकों के साथ दाचीगाम में पिकनिक मना रहे हैं. सुनील शर्मा, जो आज अनंतनाग में शंकराचार्य श्रृंगेरी मठ के साथ सूर्य मंदिर के दौरे पर थे, ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में पुनर्विकास कार्य के तहत 300 से अधिक मंदिरों का जीर्णोद्धार करवा रही है.

‘उमर अब्दुल्ला को अपनी सरकार गिरने का डर सता रहा है’

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा अपने आवास पर बुलाई गई बैठक का स्थान अचानक बदलकर दाचीगाम किए जाने की खबरों पर सुनील शर्मा ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग बीजेपी का एजेंडा रहा है, जबकि ये लोग अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे थे. सुनील शर्मा ने कहा, ‘उमर अब्दुल्ला को अपनी सरकार गिरने का डर सता रहा है, और मेरी बात मानिए, वे जल्द ही एक और ‘फ्लोर टेस्ट’ करवाएंगे.’

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए एक ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाने हेतु शुरू किए गए नए अभियान पर टिप्पणी करते हुए सुनील शर्मा ने कहा कि ये दोनों वंशवादी पार्टियां गृह विभाग की पूरी शक्तियां हासिल करके जम्मू-कश्मीर के और अधिक लोगों की जान लेना चाहती हैं.

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गृह विभाग दे दिया होता तो 150-200 लोग मारे जा चुके होते’- सुनील शर्मा 

सुनील शर्मा ने दावा करते हुए कहा, ‘उमर अब्दुल्ला लगभग दो वर्षों से सत्ता में हैं, यदि गृह विभाग और सुरक्षा संबंधी शक्तियां उन्हें सौंप दी गई होतीं, तो अब तक हिंसा में 150-200 लोग मारे जा चुके होते.’ उन्होंने यह भी कहा कि कितना भी दबाव क्यों न बनाया जाए, भारत सरकार जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए बाध्य नहीं होगी.

राज्य का दर्जा बहाल करने और एक संयुक्त मोर्चा बनाने के मुद्दे पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती द्वारा बीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों को लिखे गए पत्र पर टिप्पणी करते हुए विपक्ष के नेता (LOP) ने कहा कि ऐसे पत्रों के लिए यह सही समय नहीं है, क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल करने पर अंतिम फैसला केवल मोदी सरकार ही लेगी.

.’राज्य का दर्जा बहाल करना, BJP का एजेंडा है’

‘पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा मुख्यमंत्री, दोनों ही अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं. राज्य का दर्जा बहाल करना, जो कि BJP का एजेंडा है, तभी बहाल होगा जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह को यह भरोसा हो जाएगा कि अब कोई आम नागरिक नहीं मारा जाएगा, कोई हमला नहीं होगा, कोई पत्थरबाजी नहीं होगी और सड़कों पर कोई हत्या नहीं होगी. तब तक, कोई भी ताकत J&K का राज्य का दर्जा बहाल नहीं कर सकती.

हालांकि BJP नेता का दावा है कि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का कितना भी दबाव भारत सरकार को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता, लेकिन अब सभी की नजरें इस बैठक के नतीजों और अगर कोई मांग उठती है, तो उन पर टिकी हैं.

लेकिन एक बात तो तय है कि जनहित के मुद्दों पर होने वाली राजनीति आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में छा जाएगी, और इसी से यह तय होगा कि दाचीगाम बैठक, जैसा कि उमर अब्दुल्ला ने दावा किया था, एक ‘बादल फटने’ जैसी घटना थी या फिर, जैसा कि विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा, महज एक पिकनिक थी.

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