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पेट्रोल-डीजल में 15% मेथनॉल की पॉलिसी में अंतर..कांग्रेस का आरोप- सरकार ने फैलाई गलत जानकारी; सुरजेवाला ने पूछे कई सवाल?


केंद्र को घेरने का मुद्दा तलाशती कांग्रेस ने अब सरकार से ई20 पेट्रोल और डीजल में 15 प्रतिशत मेथनॉल मिलाने को लेकर सवाल पूछा है. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की इस योजना में तालमेल की भारी कमी बताई है. 

उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आदरणीय प्रधानमंत्री और नितिन गडकरी जी. BJP सरकार ने E20 पेट्रोल फ्यूल ब्लेंड (मिश्रण) के बारे में बहुत सारी झूठी बातें, गलत तथ्य और आधी-अधूरी जानकारी फैलाई है.

उन्होंने कहा कि मंगलवार को नितिन गडकरी का इंटरव्यू, पेट्रोलियम मंत्रालय की 23 जून से 10 जुलाई तक की प्रेस रिलीज और कई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने असलियत सामने ला दी है. मोदी सरकार तकनीकी शब्दों के जरिए लोगों को भ्रमित करना चाहती थी. 

उन्होंने कहा, ‘मैं यहां भारत के लोगों और 36 करोड़ रजिस्टर्ड वाहन मालिकों जिनके पास दो/तीन/चार पहिया वाहन है, की असली चिंताएं रख रहा हूं. नीति आयोग के 2021 के ‘इथेनॉल ब्लेंडिंग’ रोडमैप में माना गया है कि मौजूदा पेट्रोल वाहनों में रबर और प्लास्टिक के पुर्जे E20 फ्यूल ब्लेंड के अनुकूल नहीं हैं. इसके लिए (i) मटीरियल की अनुकूलता (ii) E20 के लिए ट्यून किए गए इंजन की जरूरत होगी.’

इसके अलावा उन्होंने कहा कि नीति आयोग के 2021 के रोडमैप में कहा गया है कि हमें अप्रैल 2023 से ई-20 मटीरियल के अनुकूल वाहन और अप्रैल 2025 से ई20 इंजन के अनुकूल वाहन मार्केट में उतारने चाहिए. 

सुरजेवाला ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं

कांग्रेस नेता ने सवाल दागते हुए पूछा, पहला सवाल यह है कि – क्या भारत सरकार ने मटीरियल की अनुकूलता और E20 के अनुकूल इंजन के मामले में अपने ही नीति आयोग और 2021 के रोडमैप की बात सुनी है? अगर नहीं, तो क्यों?

सुरजेवाला ने कहा,  ‘ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (ARAI) की रिपोर्ट, जिसे प्रकाशित नहीं किया गया, में कहा गया है कि E20 रबर से बने फ्यूल सिस्टम के पुर्जों – जैसे होज, गैस्केट, सील और O-रिंग – को तेजी से खराब करता है. गडकारी ने भी इस बात को माना है.’

दूसरा सवाल यह है कि मोदी सरकार पेट्रोल में ई20 फ्यूल ब्लेंड क्यों लागू कर रही है? जबकि उसने यह पक्का नहीं किया है कि 36 करोड़ गाड़ियां ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए मटीरियल के हिसाब से सही, और इंजन के हिसाब से सही हैं या नहीं? यह सब सरकार पर खर्च क्यों नहीं किया जा रहा है?

इसके अलावा सुरजेवाला ने कहा कि यह माना हुआ तथ्य है. ई-20 पेट्रोल फ्यूल ब्लेंड से गड़ियों का औसत माइलेज कम हो जाता है. इंटरव्यू में भी केंद्रीय मंत्री ने इस बात को माना है. सरकार भी मानती है कि फ्यूल माइलेज में 5 प्रतिशत की कमी आती है. लोगों की मानें तो यह 15 प्रतिशत से ज्यादा की कमी है. 

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फ्यूल के एवरेज और उसके गाड़ियों पर असर को क्यों नहीं बता रही सरकार ?

सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ई-20 पेट्रोल फ्यूल ब्लेंड के इस्तेमाल से फ्यूल एवरेज और उसके असर को साफ-साफ क्यों नहीं बता रही है? क्या यह सच नहीं है कि शहर में गाड़ी चलाने की स्थितियों में फ्यूल माइलेज का नुकसान और भी ज्यादा होता है?  सुरजेवाला ने अपने बयान में कहा है कि ई-20 पेट्रोल फ्यूल ब्लेंड के लिए फ्लेक्स इंजन टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है. 

इसके अलावा सुरजेवाला ने अगला सवाल पूछा कि लगभग 36 करोड़ के गाड़ी मालिकों का क्या होगा, जिनकी गाड़ियां फ्लेक्स इंजन टेक्नोलॉजी के हिसाब से बनी हैं? इथेनॉल की कीमत 75 रुपए प्रति लीटर है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 प्रति लीटर है. कई राज्यों में यह 110 प्रति लीटर से ज्यादा है. 

सुरजेवाला ने पार्टी की तरफ से पांचवां सवाल रखते हुए पूछा कि जब ई-20 पेट्रोल फ्यूल ब्लेंड में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है, तो आम लोगों के इस पेट्रोल की कीमतें 20 प्रतिशत कम क्यों नहीं है? सरकार 75 प्रति लीटर के इथेनॉल को मिलाकर उसे 102 प्रति लीटर में क्यों बेच रही है? केंद्र सरकार और नितिन गडकरी अब 15 प्रतिशत मेथनॉल डीजल ब्लेंड की बात कर रहे हैं. यह असम के पेट्रो रिफाइनरी की तरफ से 20 से 22 प्रति लीटर की लागत से 700 टन मेथनॉल के उत्पादन पर आधारित है. 

इथेनॉल के लिए गन्ने और धान का उपयोग, खाद्य व्यवस्था पर नहीं पड़ेगा असर? 

इसके अलावा सुरजेवाला ने पूछा कि क्या मोदी सरकार सभी डीजल गाड़ियों के लिए 15 प्रतिशत मेथनॉल डीजल फ्यूल ब्लेंड लागू करने जा रही है? मोदी सरकार अपने अनाज भंडार से इथेनॉल प्लांट को 2,320 प्रति क्विंटल की सब्सिडी वाली कीमत पर धान सप्लाई कर रही है. 

इसके अलावा सातवां सवाल पूछते हुए सुरजेवाला ने कहा कि क्या इथेनॉल बनाने के लिए पीडीएस चावल और गन्ने का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हमारी खाद्य सुरक्षा पर असर नहीं डालेगा? उन्होंने कहा कि बायो फ्यूल पर राष्ट्रीय नीति-2018 के मुताबिक, 2025-26 में इथेनॉल की 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग शुरु हो गई है. 

सुरजेवाला ने आठवां सवाल पूछा कि मोदी सरकार ने सभी चिंताओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया? देश और 36 करोड़ वाहन मालिकों को गंभीर जवाब चाहिए, न कि प्रेस रिलीज.

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