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महाराष्ट्र: पुणे मोशी कचरा डंप हादसे में मौत का आंकड़ा 9 पहुंचा, चौथे दिन 8 और शव बरामद


पुणे के पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के मोशी कचरा डंप में हुए भीषण हादसे में चौथे दिन चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे में फंसे 8 और लोगों के शव बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही इस दुर्घटना में मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है. यह हादसा 8 जुलाई को दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ था, जब मोशी स्थित कचरा डंप में कचरे का विशाल ढेर ‘वेस्ट टू एनर्जी’ परियोजना की प्रशासनिक इमारत पर गिर गया. 

दुर्घटना के समय इमारत के अंदर 22 और इमारत के बाहर कचरे के ढेर के नीचे 1, कुल 23 लोग फंस गए थे. हादसे के तुरंत बाद शुरू किए गए राहत एवं बचाव अभियान में इमारत से 5 लोग स्वयं सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि उसी दिन 9 अन्य लोगों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. 

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राहत-बचाव दल ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

इसके बाद शेष लोगों की तलाश के लिए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका, पीएमआरडीए अग्निशमन दल और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त रूप से अभियान जारी रखा. 9 जुलाई को मलबे से भावेश वाणी को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

दुर्घटनाग्रस्त इमारत अत्यधिक क्षतिग्रस्त और अस्थिर होने के कारण बचाव कार्य में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. मलबा हटाने के लिए 12 पोकलेन मशीनें, जेसीबी और डंपरों की मदद ली गई. इसके बाद इमारत के खतरनाक हिस्से को हटाने के लिए दो अत्याधुनिक डिमोलिशन एक्सकेवेटर मशीनें मौके पर तैनात की गईं. 

शनिवार को इन लोगों के शव हुए बरामद

NDRF के तकनीकी मार्गदर्शन में इमारत के अस्थिर हिस्से को नियंत्रित तरीके से हटाया गया, जिसके बाद अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना संभव हो सका. शनिवार को चले सर्च ऑपरेशन के दौरान अक्षय सावंत (35), सुनील कोरके (40), सन्नी माने (39), महेश कुंभार (33), नागेश गायकवाड़ (26), रणजीत पाटील (22) और राहुल गायकवाड़ (35) के शव बरामद किए गए.

सभी को पिंपरी के वाईसीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. फिलहाल इमारत के पास कचरे के ढेर में दबे एक अन्य व्यक्ति की तलाश जारी है. खोज अभियान में NDRF की डॉग स्क्वॉड टीम और आधुनिक मशीनों की सहायता ली जा रही है. प्रशासन ने कहा है कि अंतिम व्यक्ति के मिलने तक राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा.

घटना पर खड़े हुए सवाल

जब बिल्डिंग के सिर्फ ग्राउंड फ्लोर के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट है, तो पहली और दूसरी मंजिल कैसे बनी? किसकी इजाजत से इसे इस्तेमाल में लाया गया? पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की या संबंधित कॉन्ट्रैक्टर की, किसकी गलती है?

एक के ऊपर एक कचरे के ढेर लगे हुए थे, जिसे नगर निगम के अधिकारियों ने नजरअंदाज किया? ऐसे सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है. लेकिन क्या जांच कमेटी में कोई दोषी माना जाएगा? या जांच सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगी? इस पर सबका ध्यान है.

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