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Explained: सदन स्थगित, लेकिन प्रदर्शन पर डटा विपक्ष! CJP के अलावा राहुल ने अलग से रख दीं कौन सी 3 मांगे?


NEET पेपर लीक मामले ने संसद को ऐसा जकड़ा कि चार दिनों तक दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो पाया. मानसून सत्र 2026 में हंगामा, नारेबाजी और बार-बार स्थगन चार दिनों का हाल रहा. अब कार्रवाई 27 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी गई है. यह स्थगन कोई आम बात नहीं है. यह उस गतिरोध का नतीजा है जो सरकार और विपक्ष के बीच पूरी तरह से चौड़ा हो चुका है. सरकार कह रही है, ‘चर्चा करो, बिना शर्त के.’ विपक्ष कह रहा है, ‘पहले इस्तीफा दो, फिर चर्चा करेंगे.’ इस बीच CJP के देशव्यापी आंदोलन ने इस मुद्दे को सड़कों तक पहुंचा दिया है…

संसद में पांच दिनों में क्या हुआ?

20 जुलाई 2026 को मानसून सत्र शुरू हुआ. NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने तुरंत ही हंगामा शुरू कर दिया. पहले दिन से ही दोनों सदनों में नारेबाजी शुरू हो गई और सदन स्थगित कर दिया. इसके बाद:

  • 21 जुलाई (दूसरा दिन): विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत नोटिस दिए. कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने स्थगन प्रस्ताव दिया. दोनों सदनों की कार्रवाई बार-बार स्थगित हुई.
  • 22 जुलाई (तीसरा दिन): फिर वही हंगामा, नारेबाजी और स्थगन का माहौल रह. विपक्ष ने साफ कह दिया, ‘शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बिना NEET मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी.’
  • 23 जुलाई (चौथा दिन): संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से हाथ जोड़कर कहा, ‘हम चर्चा के लिए तैयार हैं, आप बिना शर्त के आइए.’ विपक्ष ने इनकार कर दिया. दोनों सदनों को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा.
  • 24 जुलाई (पांचवां दिन): विपक्षी सांसदों ने सुबह 10:30 बजे संसद के मकर द्वार के बाहर प्रदर्शन किया. सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए. NDA सांसदों ने भी जवाबी प्रदर्शन किया और सदन की कार्रवाई 27 जुलाई तक स्थगित कर दी गई.

यानी पांच दिनों में एक भी दिन सदन ठीक से नहीं चला. बिल पास नहीं हुए और न ही सवाल-जवाब हुए. मानसून सत्र के पहले चार दिनों में बिना किसी कामकाज के दोनों सदन स्थगित होते रहे. फिलहाल सदन में 28 लंबित बिल हैं और कार्रवाई अब 27 जुलाई तक टली है.

कांग्रेस और विपक्ष की मांगें: राहुल की ‘नॉन-नेगोशिएबल’ तीन शर्तें

कांग्रेस और सपा समेत सभी विपक्षी दल CJP के साथ खड़े हैं. लेकिन कांग्रेस ने अपनी अलग मांगें भी रखी हैं. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन मांगें रखीं और इन्हें ‘नॉन-नेगोशिएबल’ (गैर-वार्ता योग्य) करार दिया:  

  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: राहुल ने कहा, ‘यह एक जायज मांग है. उन्होंने देश और दुनिया को दिखा दिया कि वे शिक्षा व्यवस्था नहीं चला सकते.’ राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधान ‘इस पद के काबिल नहीं और पेपर लीक की साजिश में शामिल हो सकते हैं.’
  • पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई: राहुल गांधी ने 20 जुलाई को पुलिस की सख्त कार्रवाई में शामिल पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. राहुल ने कहा, ‘जिस किसी ने भी छात्रों पर हमला किया, उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए’.
  • PM मोदी छात्रों से माफी मांगें: राहुल ने TED-स्टाइल प्रेजेंटेशन में दावा किया कि पिछले 10 सालों में 152 पेपर लीक हुए हैं, 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं और एक भी दोषी को सजा नहीं हुई. राहुल ने यह भी बताया कि NEET कोचिंग पर सालाना 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि पूरा शिक्षा बजट करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये का है.

राहुल ने कहा, ‘यह कैसे तय होगा कि चर्चा कैसे होगी, यह सरकार अकेले तय नहीं कर सकती. पहले प्रधान को इस्तीफा देना होगा और PM को माफी मांगनी होगी. ये पहले कदम हैं. फिर हम सिस्टम में बदलाव देखना चाहते हैं.’

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने भी साफ कहा, ‘हम अपनी मूल मांगों पर पीछे नहीं हटेंगे, जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से शुरू होती हैं.’ उन्होंने कहा कि AAP और DMK को छोड़कर बाकी सभी विपक्षी दल इस रुख पर सहमत हैं. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी दोहराया, ‘जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते, चर्चा शुरू नहीं होगी.’

CJP की मांगें: ‘जनता की अदालत’ क्या चाहती है?

CJP इस आंदोलन की रीढ़ है. 24 जुलाई को CJP की सरकार के साथ कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मीटिंग भी हुई. CJP ने साफ कह दिया कि प्रदर्शन जारी रहेगा, जब तक मांगें नहीं मानी जातीं. CJP की तीन मुख्य मांगें हैं:  

  • धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: यह CJP की सबसे बड़ी और नॉन-नेगोशिएबल मांग है.
  • NEET पेपर लीक से पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवज़ा.
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस.

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने PM मोदी के फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ऐलान को ‘बैंड-एड’ (पट्टी) करार दिया, यानी सतही इलाज, असली समस्या का हल नहीं. CJP ने यह भी साफ कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा.

अब सरकार क्या कह रही है?

सरकार का रुख साफ है कि बातचीत करने को तैयार है, लेकिन कोई शर्त नहीं होनी चाहिए…

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से हाथ जोड़कर कहा, ‘हम NEET पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार हैं. विपक्ष पूर्व शर्तें लगाकर और बहाने बनाकर चर्चा से भाग रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘हम विपक्ष से हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं कि कृपया तय करें कि चर्चा कब शुरू करनी है. हम तैयार हैं, लेकिन आप शर्तें लगा रहे हैं.’

PM मोदी ने 23 जुलाई की रात एक सेल्फी वीडियो में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘हमारे युवाओं के भविष्य और कल्याण से बड़ा कुछ नहीं है.’ लेकिन CJP और विपक्ष ने इस ऐलान को खारिज कर दिया. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, ‘विपक्ष न तो चर्चा चाहता है, न सदन चलने देना चाहता है.’ बीजेपी ने सभी NDA सांसदों को व्हिप जारी कर कहा कि वे सदन में मौजूद रहें.

संसद के बाहर क्या हो रहा है?

संसद के अंदर हंगामा, बाहर भी हंगामा बरपा है…

  • मकर द्वार पर आमने-सामने: 23 जुलाई को NDA और INDIA ब्लॉक के सांसद संसद के मकर द्वार पर आमने-सामने खड़े हो गए. विपक्ष NEET पेपर लीक पर प्रदर्शन कर रहा था, NDA ने जवाबी प्रदर्शन किया. 24 जुलाई को विपक्षी सांसदों ने सुबह 10:30 बजे फिर से मकर द्वार पर प्रदर्शन किया.
  • CJP का देशव्यापी आंदोलन: CJP ने 24 जुलाई को ‘हर जिले, एक दिन, एक मांग’ के नारे के साथ देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया है.

तो फिर अब 27 जुलाई के बाद क्या?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, तीन दिन बद बीतन तीन संभावित रास्ते हो सकते हैं:

  • आंदोलन और तेज: अगर CJP का देशव्यापी आंदोलन और फैला और विपक्ष ने 27 जुलाई को भी सदन नहीं चलने दिया, तो यह गतिरोध और गहरा सकता है. विपक्ष और CJP ने पहले ही कहा है कि जब तक प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा.
  • बीच का रास्ता निकाले बीजेपी: सरकार कुछ रियायतें दे सकती है, जैसे FIR वापसी या मुआवजे का ऐलान. लेकिन CJP और विपक्ष की मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अभी बाकी है. राहुल ने इसे ‘नॉन-नेगोशिएबल’ कहा है.
  • सरकार का बड़ा कदम: एक्सपर्ट्स कै मुताबिक, अगर सरकार धर्मेंद्र प्रधान को हटाने का फैसला करती है, तो यह एक बड़ा राजनीतिक बदलाव होगा. अगर ऐसा होता है तो यह सरकार की कमजोरी मानी जाएगी और बीजेपी के अंदरूनी गलियारों में भी असर पड़ेगा.

यह सिर्फ NEET का मामला कैसे नहीं बचा?

यह आंदोलन NEET पेपर लीक से शुरू हुआ, लेकिन अब यह बड़े सवाल पर पहुंच गया है कि क्या भारत की परीक्षा प्रणाली भरोसे के लायक है? क्या सरकार युवाओं की आवाज सुन रही है? क्या संस्थाएं जवाबदेह हैं?

राहुल गांधी ने कहा, ‘सिस्टम की संकट सिर्फ पेपर लीक नहीं है, बल्कि यह भी है कि सिस्टम गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए अफोर्डेबल नहीं रहा.’ तो वहीं, CJP का कहना है, ‘सख्त सजा से पेपर लीक नहीं रुकेगी, बल्कि सिस्टम बदलना होगा.’



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