उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आयोजित एक सभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह देश के युवाओं के संघर्ष, मेहनत और लंबे आंदोलन की बड़ी जीत है. ओवैसी ने कहा कि छात्रों ने लगातार आवाज उठाई और आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा.
ओवैसी ने कहा कि वह उन छात्रों को सलाम करते हैं, जिन्होंने कई हफ्तों तक जंतर-मंतर पर बैठकर आंदोलन किया. उन्होंने कहा कि छात्रों ने ऐसा मंत्र पढ़ा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी देर रात वीडियो संदेश जारी करना पड़ा. ओवैसी ने कहा कि देश में तानाशाही नहीं चल सकती और जब लोग संगठित होकर अपनी आवाज उठाते हैं तो सत्ता को भी उनकी बात सुननी पड़ती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होंगी और छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलेगी.
राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी की राय
सभा के दौरान ओवैसी ने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अब लोग केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं चाहते, बल्कि बराबरी का अधिकार चाहते हैं. उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि AIMIM नहीं चाहती कि भारतीय जनता पार्टी दोबारा सत्ता में आए. ओवैसी ने कहा कि वह विपक्षी दलों के साथ हाथ मिलाने और गठबंधन करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील करते हुए कहा कि अभी बातचीत का समय है और चुनाव खत्म होने के बाद पछताने का कोई फायदा नहीं होगा.
देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका
ओवैसी ने यह भी कहा कि देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका और बढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी युवा है और भविष्य की राजनीति में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होगी. उनके अनुसार एआईएमआईएम का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि जनता के असली मुद्दों को उठाना और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कई नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं और मुख्यमंत्री या सरकार बनाने की बातें करते हैं, लेकिन जनता को अपनी नेतृत्व क्षमता विकसित करनी चाहिए और अपने प्रतिनिधियों को मजबूत बनाना चाहिए.
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