विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड शुगर की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है. इससे डेंगू वायरस शरीर में तेजी से फैल सकता है. ऐसे मरीजों में प्लेटलेट्स काउंट अचानक कम होने, शरीर के अंदरूनी हिस्सों में ब्लीडिंग होने और डेंगू शॉक सिंड्रोम का खतरा भी बढ़ जाता है. शोध में यह भी बताया गया है कि उम्र, मोटापा, किडनी की बीमारी और अनियंत्रित ब्लड शुगर जैसी स्थितियां इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं. इनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक और गंभीर संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 2 से 4 गुना तक ज्यादा होता है. देश में बड़ी संख्या में मरीजों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, इसलिए डायबिटीज मरीजों की नियमित देखभाल में डेंगू वैक्सीन को शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए. कई अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वेशनल स्टडी और मेटा-एनालिसिस भी यह संकेत देते हैं कि डायबिटीज मरीजों में गंभीर डेंगू और मृत्यु का खतरा ज्यादा हो सकता है.

डायबिटीज मरीजों में डेंगू के शुरुआती लक्षण सामान्य लोगों जैसे ही हो सकते हैं. इनमें तेज बुखार, शरीर और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं. अगर ये लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही नहीं करनी चाहिए.

अगर डेंगू के दौरान लगातार उल्टी हो, पेट में तेज दर्द हो, बहुत ज्यादा कमजोरी या सुस्ती महसूस हो, मसूड़ों या नाक से खून आए, पेशाब कम होने लगे, चक्कर आने लगें या ब्लड शुगर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए या गिर जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज मरीजों को मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट का इस्तेमाल करना चाहिए और पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने चाहिए. घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए जिससे मच्छर न पनपें. साथ ही ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखना, नियमित जांच कराना, पर्याप्त पानी पीना और बैलेंस डाइट लेना भी जरूरी है. अगर बुखार 1 से 2 दिन से ज्यादा बना रहे तो बिना देरी किए डॉक्टर से मिलना चाहिए.

डेंगू होने पर मरीज की स्थिति, भूख और शरीर में पानी की मात्रा को देखते हुए कुछ डायबिटीज दवाओं में अस्थायी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है. इसके साथ ही ब्लड शुगर, प्लेटलेट्स काउंट और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी करना जरूरी है. इससे गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है.
Published at : 27 Jul 2026 07:49 AM (IST)
