दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों को खाना बांट रहे मोहम्मद जुनैद ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार (24 जुलाई) रात को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया. जुनैद ने कहा कि उससे पूछताछ हुई, उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर मसूरी ले जाया गया. जुनैद ने दावा किया कि उसे पूरी रात आंखों पर पट्टी बांधकर रखा गया था. जुनैद के मुताबिक, अगली सुबह एक अधिकारी ने कथित तौर पर उससे पैसे का सोर्स और रोज जंतर-मंतर खाना बांटने को लेकर पूछताछ की.
जुनैद को पुलिस ने मसूरी में छोड़ा
जुनैद ने दावा किया कि पुलिस ने उसे मसूरी ले गई और वहीं छोड़ दी, जिसके बाद वह शनिवार (25 जुलाई 2026) को टैक्सी से दिल्ली वापस आया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो में जुनैद ने बताया कि उन्हें और उनके एक दोस्त को कुछ लोगों ने रोका, जिन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का जवान बताया. ज़ुनैद उस समय आरएमएल (RML) अस्पताल से लौट रहा था. ज़ुनैद का कहना है कि जब उन लोगों ने उससे पूछताछ की तो उसने बताया कि प्रदर्शन में शामिल वोलंटियर्स को खाना और पानी समर्थकों के दान और डिलीवरी के जरिए मिलता है.
सीजेपी पर जुनैद ने उठाए सवाल
जुनैद ने ये भी दावा किया कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी से उस तरह का सपोर्ट नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा, ‘सीजेपी को सपोर्ट करना चाहिए. हमने लगातार उनके साथ संघर्ष किया है… लीगल टीम काम कर रही है. इसमें विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए. जुनैद से जब पूछा गया कि क्या सीजेपी आपसे किनारा कर रही है तो उन्होंने कहा, शायद मुझे ऐसा लगता है, लेकिन हम चाहते हैं कि हम सब मिलकर ये लड़ाई लड़ें. हम स्टूडेंट्स के साथ हैं.’
सीजेपी ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा संगठन की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद नीट विवाद को लेकर 36 दिन से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी. परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून को छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था.
सीजेपी ने कब बंद किया प्रोटेस्ट?
धीरे-धीरे यह हाल के समय के युवाओं के नेतृत्व वाले सबसे अहम आंदोलनों में से एक बन गया. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 28 जून को छात्रों के समर्थन में उतरने और जंतर-मंतर पर आइसा के छह कार्यकर्ताओं के साथ अनशन शुरू करने के बाद सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया.
दिल्ली पुलिस की ओर से वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद छात्रों और युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया. वांगचुक ने केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार को 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. उन्होंने प्रधान के इस्तीफे के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘लोकतंत्र की जीत, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… जो सीधे सड़कों से निकला है.’
