तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बुधवार (29 जुलाई 2026) को इलेक्शन कमीशन को एक पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने विरोधी गुटों की तरफ से किए गए दावों पर जल्द से जल्द जांच करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को दो बार समय बढ़ाने की सुविधा दी गई. इसके बाद भी वह जवाब दाखिल करने में नाकाम रहे.
उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि उनके गुट ने आयोग की तरफ से 6 जुलाई की समय सीमा के भीतर अपनी राय दे दी थी. विरोधी गुट को पहले 10 फिर 25 जुलाई तक का समय दिया गया था.
ममता ने कहा, ‘दो बार समय बढ़ाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला. इसलिए माना जा सकता है कि 6 जुलाई 2026 के हमारे पत्र में बताई गईं सारी बातें और बयान मान लिए गए हैं. उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है.’
बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि विरोधी गुट अपना पक्ष मजबूत करने के लिए झूठे सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है. उनके पास किसी तरह का जवाब नहीं है. बनर्जी ने कहा है कि विरोधी गुट अपना पक्ष मजबूत करने के लिए झूठे सबूत बनाने की कोशिश कर रहा है. जबकि उनके गुट ने इन आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है.
झूठे सबूत बनाने की कोशिश कर रहे ऋतब्रत बनर्जी गुट: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा है कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि आपके द्वारा समय बढ़ाए जाने के कारण ऋतब्रत बनर्जी और अन्य लोग अपना पक्ष मजबूत करने के लिए झूठे सबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इनके आरोपों में कोई दम नहीं है. इनका हमने पूरीत मजबूती से खंडन किया है. दोनों पक्षों के लिए समान अवसर होने चाहिए. 25 जुलाई के बाद विरोधी गुट को और समय देना गलत होगा.
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इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, चूंकि पश्चिम बंगाल में इस मामले में गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं. इसलिए अनुरोध है कि जांच को जल्द से जल्द पूरा किया जाए. उन्हें अपनी राय देने के लिए और समय न दें. 2 जुलाई को आयोग के पत्र में भी समय मांगा गया था.
इसके अलावा पत्र में कहा गया है कि न्याय भरोसे पर आधारित होना चाहिए. अगर 25 जुलाई 2026 के बाद और समय दिया जाता है, तो वह भरोसा डगमगा जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पूरा मामला 2 जुलाई को चुनाव आयोग के पास पूरा मामला पहुंचा. जब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग से संपर्क किया. इसमें उन्होंने खुद को असली AITC बताया और संगठनात्मक बदलावों को मान्यता देने की मांग की. इसके बाद चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों को पत्र लिखकर विरोधी दावों पर उनकी राय मांगी. 6 जुलाई को शाम 5.30 बजे तक जवाब देने को कहा गया. जहां बनर्जी के नेतृत्व गुट ने सही समय पर जवाब दे दिया.
वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने और समय मांगा और उन्हें 10 जुलाई और बाद में 25 जुलाई तक समय दिया गया. इसी महीने की शुरुआत में विरोधी गुट के दावे को ममता बनर्जी गुट ने खारिज कर दिया था. ममता बनर्जी की तरफ से कहा गया है कि आखिरी संगठनात्मक चुनाव 2022 में हुए थे. तर्क दिया कि विरोधी गुट का यह दावा कमेटियां 2025 में खत्म हो गईं, तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है..
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