राजस्थान में भर्ती परीक्षाएं कराने वाली प्रमुख संस्थानों की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है. राज्य की तीन बड़ी परीक्षा एजेंसियां राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) और राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पद की समस्या से जूझ रही है. जिसके चलते राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, समयबध्दता और प्रशासनिक क्षमता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन संस्थानों में नियुक्तियों के लिए स्पष्ट नियम और स्थायी व्यवस्था नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
RPSC में अध्यक्ष सहित कई पद खाली
राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष सहित कुल 11 पदों का प्रावधान है. फिलहाल आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है और कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली जा रही है. इसके अलावा चार सदस्य पद भी रिक्त हैं. वहीं जल्द ही एक अन्य सदस्य के रिटायर्ड होने के बाद रिक्तियों की संख्या और बढ़ जाएगी. सबसे बड़ी बात यह है कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया या योग्यता संबंधी नियम निर्धारित नहीं है. कई अन्य राज्यों के लोक सेवा आयोग में कार्य संचालन के लिए अलग-अलग नियम लागू हैं, लेकिन राजस्थान में ऐसी व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी.
नए RPSC अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी नजर
आरपीएससी अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार नए अध्यक्ष नियुक्ति की तैयारी में जुटी है. फिलहाल कार्यवाहक व्यवस्था लागू है, लेकिन आगामी आरएएस, आरपीएस और दूसरी बड़ी भर्ती परीक्षाओं को देखते हुए स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति को अहम माना जा रहा है. कुछ रिपोर्ट के अनुसार इस पद के लिए कुछ वरिष्ठ और रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स के नाम पर चर्चा चल रही है. हालांकि अंतिम फैसला सरकार की ओर से ही लिया जाएगा. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री की सिफारिश पर की जाती है.
RSSB में भी पूरी नहीं हो सकी नियुक्तियां
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. बोर्ड में एक अध्यक्ष और चार सदस्यों का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में केवल अध्यक्ष और दो सदस्य ही कार्यरत है. बाकी पद अभी भी खाली है. यह बोर्ड राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में बड़ी संख्या में होने वाली भर्तियों का जिम्मा संभालता है. इसके बावजूद बोर्ड के संचालन के लिए भी कार्य संचालन संबंधी स्पष्ट नियम नहीं बनाए गए हैं.
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RBSE में भी लंबे समय तक खाली रहा अध्यक्ष पद
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थिति भी लंबे समय तक चर्चा का विषय रही. बोर्ड में अध्यक्ष सहित कई प्रकार के सदस्यों की व्यवस्था है, लेकिन अध्यक्ष का पद काफी समय तक खाली रहा. हाल ही में राज्य सरकार ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति की है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार बोर्ड की वर्तमान संरचना में बदलाव कर इसे ज्यादा स्थायी और व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि आरबीएसई का पुनर्गठन कर अध्यक्ष और स्थायी सदस्यों की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, ताकि बोर्ड का संचालन ज्यादा प्रभावित तरीके से हो सके.
नियुक्तियों के लिए स्पष्ट नियम नहीं होने पर उठ रहे सवाल
राज्य की तीन संस्थाओं को लेकर एक समान चिंता यह है कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए कोई निश्चित पात्रता या चयन प्रक्रिया तय नहीं है. ऐसे में नियुक्तियों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक प्रभाव और पारदर्शिता पर भी सवाल उठते रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार चाहे तो कानून बनाकर या आवश्यक संशोधन के माध्यम से नियुक्तियां के लिए स्पष्ट मानदंड तय किया जा सकते हैं. इससे संस्थाओं की कार्यप्रणाली ज्यादा जवाबदेही और पारदर्शी बन सकती है.
शिक्षा विभाग में रिक्त पदों का मुद्दा भी गरमाया
इस बीच प्रदेश में शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया है कि शिक्षा विभाग में करीब डेढ़ लाख पद रिक्त हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को दो या तीन विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं, जिससे विशेष रूप से विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
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