सबसे पहले बड़ी बहन मीनाक्षी आनंद चौधरी इस पद तक पहुंची. वह 1969 बैच की आईएएस अधिकारी थी और हरियाणा की पहली महिला मुख्य सचिव बनी. उन्होंने 8 नवंबर 2005 से 20 अप्रैल 2006 तक मुख्य सचिव के तौर पर काम किया.

इसके बाद 1975 बैच की आईएएस अधिकारी उर्वशी गुलाटी ने हरियाणा की मुख्य सचिव की जिम्मेदारी संभाली. वह 31 अक्टूबर 2009 से 3 मार्च 2012 तक इस पद पर रही.

तीसरी बहन केशनी आनंद अरोरा ने भी अपनी बहनों की तरह आईएएस में लंबा करियर बनाया. 1983 बैच की आधिकारिक केशनी आनंद अरोरा ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया दूसरी रैंक हासिल की थी. वह हरियाणा की 33 वीं मुख्य सचिव बनीं और 2019 से 2020 तक इस पद पर रही.

इन तीनों बहनों की सफलता के पीछे उनके पिता जगदीश आनंद की भूमिका भी बताई जाती है. वह पंजाब यूनिवर्सिटी में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे. उनका परिवार मूल रूप से रावलपिंडी का था और 1947 के विभाजन के बाद भारत आकर बस गया.

जगदीश आनंद शिक्षा को आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम मानते थे. उन्होंने अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया. तीनों ने आगे चलकर यूपीएससी परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बनीं. बाद में तीनों बहनों ने हरियाणा के मुख्य सचिव के पद तक पहुंच कर परिवार के लिए अलग पहचान बनाई.

वहीं केशनी आनंद अरोरा की बेटी श्रुति अरोरा का जन्म 16 सितंबर 1992 को हुआ. उन्होंने यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी चंडीगढ़ से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के साथ वह राष्ट्रीय स्तर की तलवारबाज और पेशेवर स्नूकर खिलाड़ी भी रही.

इंजीनियरिंग के बाद श्रुति ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. पहले और दूसरे प्रयास में सफलता नहीं मिली. लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 118वीं रैंक हासिल की और आईपीएस अधिकारी बनी.

श्रुति अरोरा एजीएमयूटी कैडर की 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी है. वह चंडीगढ़ शहर पुलिस अधीक्षक के पद पर भी सेवाएं दे चुकी है. 27 जनवरी 2024 को उन्होंने लेह के पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला था.
Published at : 18 Sep 2026 07:04 PM (IST)
