- इस फैसले को दलबदलुओं के लिए बड़ी चेतावनी बताया गया।
एक ऐतिहासिक फैसले में, तेलंगाना हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार (18 सितंबर, 2026) को खैरताबाद के MLA दानम नागेंद्र को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया और उनकी विधानसभा सीट को खाली करार दिया. बेंच ने स्पीकर के उन पिछले आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें उन्हें अयोग्य ठहराने की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था.
बेंच ने पाया कि नागेंद्र, जिन्होंने 2023 का विधानसभा चुनाव BRS के टिकट पर जीता था और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे, ने एक सक्रिय MLA रहते हुए कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़कर संविधान की 10वीं अनुसूची का स्पष्ट उल्लंघन किया है. इसके साथ ही, बेंच ने प्रतिवादियों की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी.
हाई कोर्ट के फैसले पर क्या बोले दानम नागेंद्र?
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए दानम नागेंद्र ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि संघर्ष और लड़ाई उनके लिए कोई नई बात नहीं है. उन्होंने हाई कोर्ट के आदेशों का स्वागत करते हुए कहा, ‘मैं लड़ूंगा और जीतूंगा.’ उन्होंने आगे कहा कि जब भी चुनाव होंगे, वे तैयार रहेंगे. वे हमेशा चुनाव लड़कर ही आगे बढ़े हैं, इसलिए लड़ना उनके लिए कोई नई बात नहीं है और वे फिर से लड़ेंगे और जीतेंगे.
क्या वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, इस सवाल पर नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने अभी भविष्य की रणनीति पर विचार नहीं किया है, लेकिन वे चुनावी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट के आदेश पर क्या कहा?
वहीं, BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी और BJP नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी की ओर से पेश होने वाले याचिकाकर्ताओं के वकील ने फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है और अन्य सभी दलबदलुओं के लिए एक चेतावनी है. वकील ने कहा, ‘हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. इसमें नागेंद्र को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया और उनकी सीट खाली करार दी गई. साथ ही, स्पीकर के पिछले आदेशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया.’
उन्होंने कहा, ‘BRS के ‘B-फॉर्म’ पर जीत हासिल करने, कांग्रेस में शामिल होने और फिर कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने को दलबदल विरोधी कानून का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है. हाई कोर्ट का यह आदेश उन सभी लोगों के लिए चेतावनी का काम करेगा, जिन्होंने अपनी पार्टियां बदली हैं.’
इसके अलावा, वकील ने बताया, ‘दूसरी पार्टी ने फैसले पर रोक लगाने की अपील की थी, ताकि वे सुप्रीम कोर्ट जा सकें, लेकिन हाई कोर्ट ने इस अपील को ठुकरा दिया. यह फैसला उन सभी विधायकों के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने पार्टियां बदली थीं. इससे यह साफ हो गया है कि जो लोग जनता के फैसले (जनादेश) का अनादर करते हैं, उन पर कानून की मार जरूर पड़ती है. उम्मीद है कि इस फैसले का तेलंगाना की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ेगा. खासकर उन BRS नेताओं पर जो कांग्रेस में शामिल हो गए थे और इससे सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ेगा.’
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