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EC पर राहुल गांधी के बयान से भड़कीं स्मृति ईरानी, याद दिलाया इतिहास


पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महासचिव स्मृति ईरानी ने लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयानों पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी ने बीजेपी पर कटाक्ष कर अपनी ही पार्टी का काला इतिहास राष्ट्र के सम्मुख प्रस्तुत कर दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों बार-बार कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से राहुल गांधी चुनाव आयोग पर हमला करते हैं, कटाक्ष करते हैं? बार-बार चुनाव आयोग की मर्यादा को छिन्न-भिन्न करके राहुल गांधी किसका एजेंडा चला रहे हैं?

राहुल गांधी पर निशाना साधकर क्या बोलीं स्मृति ईरानी?

भाजपा महासचिव स्मृति ईरानी ने शुक्रवार (18 सितंबर, 2026) को लोकसभा LoP राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए एक वीडियो पोस्ट शेयर किया. वीडियो पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘आज राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कटाक्ष कर अपनी ही पार्टी का काला इतिहास राष्ट्र के सामने पेश कर दिया. क्या ये सच नहीं है साल 1980 में कांग्रेस की केंद्र की सरकार ने देश की नौ प्रादेशिक सरकारों को आर्टिकल 356 का सहारा लेकर डिसमिस कर दिया था? क्या यह सच नहीं कि यूपीए के कार्यकाल में साल 2005 में कांग्रेस पार्टी ने बिहार की विधानसभा को भंग कर दिया? और कांग्रेस का यह कृत्य सुप्रीम कोर्ट ने गैर-संवैधानिक करार दिया.’ 

उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग ने न सिर्फ एक अपब्रिंगर के तौर पर, बल्कि एक आयोग के रूप में भी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके यह सुनिश्चित किया है कि देश के हर एक नागरिक का वोट मायने रखता है. क्यों बार-बार कांग्रेस पार्टी और विशेष रूप से राहुल गांधी चुनाव आयोग पर प्रहार करते हैं, कटाक्ष करते हैं? बार-बार चुनाव आयोग की मर्यादा को छिन्न-भिन्न करके राहुल गांधी किसका एजेंडा चला रहे हैं?’

भाजपा को लेकर क्या बोले थे राहुल गांधी

दरअसल, लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने एक X पोस्ट में कहा, ‘पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस. हर बार एक ही पैटर्न – BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं. फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है. जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं.’

उन्होंने कहा, ‘वोट चोरी. सरकार चोरी. अब पार्टी चोरी – ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं. ECI की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है – मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं. यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है. यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है.’

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