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South Kali Peeth: दक्षिण काली पीठ में आधी रात शुरू होता दिव्य सावन अनुष्ठान


South Kali Peeth: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति, तप और साधना का प्रतीक माना जाता है. इसी पावन अवसर पर दक्षिण काली पीठ इन दिनों श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां हर रात एक ऐसा दिव्य अनुष्ठान होता है, जिसे देखने और उसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज के राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. आधी रात से पहले पवित्र गंगा स्नान, उसके बाद मौन साधना और फिर भगवान शिव का विधि-विधान से रुद्राभिषेक यह संपूर्ण क्रम श्रद्धालुओं के लिए एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव बन रहा है.

मंदिर परिसर में देर रात तक भक्तों की उपस्थिति, मंत्रोच्चार की गूंज और भक्ति का वातावरण सावन की महिमा को और भी विशेष बना देता है.

आधी रात गंगा स्नान के बाद मौन व्रत और भगवान शिव की आराधना:

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज प्रतिदिन रात 12 बजे से पहले गंगा स्नान कर मौन व्रत धारण करते हैं. इसके बाद भगवान शिव का विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और वैदिक मंत्रों के साथ आराधना संपन्न होती है.

मौन साधना के साथ किया जाने वाला यह अनुष्ठान भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. श्रद्धालु मानते हैं कि इस दौरान पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव होता है. पूजा के समापन पर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज रुद्राभिषेक में शामिल श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी प्रदान करते हैं.

देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु:

सावन के पवित्र महीने में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि कई अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु दक्षिण काली पीठ पहुंच रहे हैं. भक्तों का कहना है कि यहां की पूजा-पद्धति, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण उन्हें बार-बार इस सिद्धपीठ की ओर खींच लाता है.

रात में होने वाला गंगा स्नान और उसके बाद रुद्राभिषेक में शामिल होकर श्रद्धालु स्वयं को आध्यात्मिक रूप से संतुष्ट महसूस करते हैं. कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां की साधना उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है.

श्रद्धालुओं ने साझा किए अपने अनुभव:

रुद्राभिषेक में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि दक्षिण काली पीठ में हर साल सावन के दौरान विशेष आध्यात्मिक अनुभूतियां होती हैं. उनका दावा है कि इस बार भी रुद्राभिषेक के दौरान नाग देवता के दर्शन हुए, जिसे उन्होंने भगवान शिव की विशेष कृपा का संकेत माना.

यह व्यक्तिगत आस्था और श्रद्धालुओं के अनुभव हैं, जिन्हें भक्त दिव्य अनुभूति के रूप में देखते हैं. कई श्रद्धालुओं ने यह भी कहा कि इस सिद्धपीठ में सच्चे मन से की गई प्रार्थना और भगवान शिव की आराधना से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं.

मंदिर सेवादार ने बताई सिद्धपीठ की विशेषता:

मंदिर के सेवादार विनोद के अनुसार, दक्षिण काली पीठ केवल एक मंदिर नहीं बल्कि ऐसा सिद्ध स्थान है, जहां देवी-देवताओं की विशेष कृपा मानी जाती है. उनका कहना है कि सावन के दौरान यहां का वातावरण और भी अधिक दिव्य और अलौकिक हो जाता है.

उन्होंने बताया कि प्रतिदिन होने वाले रुद्राभिषेक, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तों की सामूहिक आराधना से पूरा परिसर भक्ति के रंग में रंग जाता है. यही कारण है कि हर साल सावन में यहां श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती है.

सावन में क्यों बढ़ जाता है दक्षिण काली पीठ का महत्व?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस दौरान रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, महामृत्युंजय जाप और मौन साधना का विशेष महत्व बताया गया है. दक्षिण काली पीठ में इन सभी धार्मिक परंपराओं का विधिवत पालन किया जाता है, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है.

रात के शांत वातावरण में होने वाली पूजा और गंगा स्नान इस अनुष्ठान को और भी विशिष्ट बनाते हैं. यही वजह है कि भक्त इसे केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और साधना का अवसर भी मानते हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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