देश में ऐसे स्कूलों की संख्या काफी कम है, जहां छात्र पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई एक ही संस्थान में पूरी कर सकते हैं. शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश के कुल 14,66,682 स्कूलों में से सिर्फ 83,185 स्कूलों में कक्षा 1 से 12वीं तक की पढ़ाई उपलब्ध है. यानी देश के केवल 5.67 प्रतिशत स्कूल ही छात्रों को प्राथमिक स्तर से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्तर तक लगातार शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं. शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में यह आंकड़े जवाब में दिए. इन आंकड़ों के लेकर सवाल देश में लगातार स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने वाले संस्थाओं और इसका छात्रों के स्कूल बदलने, पढ़ाई जारी रखने और ड्रॉप आउट पर पड़ने वाले असर से जुड़ा था. वहीं इन आंकड़ों में यह भी सामने आया कि ज्यादातर छात्रों को स्कूली शिक्षा के अलग-अलग चरणों में पहुंचने के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाना पड़ता है.
14.66 लाख स्कूलों में सिर्फ 83 हजार में 1 से 12वीं तक पढ़ाई
यूडीआईएसई+ 2025-26 के तहत देश में कुल 14,66,682 स्कूल दर्ज है. इनमें से केवल 83,185 स्कूल ऐसे हैं, जहां पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की शिक्षा एक ही संस्थान में उपलब्ध है. यह कुल स्कूलों का महज 5.67 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि देश के 94 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों में छात्रों को पहली से 12वीं तक की पूरी पढ़ाई एक ही स्कूल में करने की सुविधा नहीं है. अलग-अलग शैक्षणिक स्तर पर छात्रों को दूसरे संस्थान में एडमिशन लेना पड़ सकता है.
स्कूल बदलने के बावजूद ट्रांजिशन रेट में सुधार
सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में स्कूल शिक्षा के अलग-अलग स्तरों के बीच छात्रों के ट्रांजिशन में सुधार भी सामने आया है. 2024-25 में प्रिपरेटरी स्टेज से मिडिल स्कूल में जाने की दर 92.2 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढ़कर 93.8 प्रतिशत हो गई. वहीं मिडिल स्कूल में सेकेंडरी स्तर पर जाने वाले छात्रों की ट्रांजिशन दर भी बढ़ी है. यह 2024-25 में 86.6 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 88.3 प्रतिशत हो गई.
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सेकेंडरी स्तर पर रिटेंशन बढ़ा, ड्रॉप आउट घटा
आंकड़ों के अनुसार सेकेंडरी स्तर पर छात्रों की पढ़ाई में बने रहने यानी रिटेंशन रेट में भी सुधार हुआ है. 2024-25 में यह दर 47.2 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढ़कर 51.9% हो गई. इस अवधि में सेकेंडरी स्तर पर ड्रॉप आउट रेट में कमी दर्ज की गई. 2024-25 में ड्रॉपआउट रेट 8.2 प्रतिशत था, जो 2025-26 में 7.0% रह गया
2018-19 से 1617 स्कूलों को अपग्रेड करने की मंजूरी
आंकड़ों ने सीनियर सेकेंडरी स्तर तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए स्कूलों के अपग्रेडेशन की जानकारी भी राज्यसभा में दी. आंकड़ों के अनुसार 2018-19 से 2026-27 के बीच 1617 सेकेंडरी स्कूलों को सीनियर सेकेंडरी स्तर पर तक अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है. इनमें सबसे ज्यादा राजस्थान के 606 स्कूलों को अपग्रेड करने की मंजूरी मिली. इसके बाद ओडिशा के 331 और पंजाब के 241 स्कूल है. वहीं उत्तर प्रदेश के 98, असम के 47 और कर्नाटक के 43 स्कूलों को सीनियर सेकेंडरी स्तर पर अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई. इसके अलावा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, जम्मू कश्मीर, नागालैंड लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भी स्कूलों को अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है.
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