समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान पर कार्रवाई करने वाले IAS आंजनेय कुमार सिंह छुट्टी पर चले गए है. उनका कार्यकाल 14 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया. वह मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर पद पर तैनात थे. कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने मुरादाबाद के डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया को कमिश्नर का प्रभार सौंप दिया और छुट्टी पर चले गए हैं.
उनके छुट्टी पर जाने के बाद वापस आने की संभावनाएं तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार की तरफ से उन्हें एक और मौका मिल सकता है. अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से अनुमति मिलती है, तो उन्हें आठवीं बार सेवा विस्तार मिल सकता है.
2015 में अखिलेश सरकार में आए थे यूपी
आंजनेय कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं, लेकिन वह 2005 बैच के सिक्किम कैडर के IAS अधिकारी हैं. वह फरवरी 2015 में तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में इंटर-कैडर डेपुटेशन पर उत्तर प्रदेश आए थे. यूपी आने के बाद उन्हें सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद जुलाई 2016 में उन्हें बुलंदशहर का जिलाधिकारी बनाया गया.
इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त वाणिज्य कर, फतेहपुर के जिलाधिकारी और फिर रामपुर के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली. मार्च 2021 में उन्हें प्रमोशन के बाद मुरादाबाद मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया.
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आजम खान के खिलाफ कार्रवाई से आए सुर्खियों में
2019 में रामपुर के जिलाधिकारी रहते हुए आंजनेय कुमार सिंह और सपा नेता आजम खान के बीच टकराव सुर्खियों में रहा. लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान के विवादित बयान के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई. बाद में हेट स्पीच मामले में आजम खान को सजा हुई और उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई. आंजनेय कुमार सिंह का डेपुटेशन मूल रूप से 2015 से 2020 तक था. इसके बाद उन्हें लगातार एक्सटेंशन मिलते गए. यानी 2020 से 2025 के बीच उन्हें कुल सात बार एक्सटेंशन मिला. इनमें चार एक्सटेंशन एकएक साल के और दो छहछह महीने के थे, जबकि सातवां एक्सटेंशन एक साल का था.
पिछली बार भी छुट्टी पर गए थे, फिर आया था एक्सटेंशन
आंजनेय सिंह के लिए यह स्थिति नई नहीं है. अगस्त 2025 में भी उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने के बाद उन्होंने मुरादाबाद कमिश्नर का चार्ज छोड़कर छुट्टी ली थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने यूपी सरकार की सिफारिश पर उनका सातवां सेवा विस्तार मंजूर कर दिया था. अगर मंजूरी मिलती है तो यूपी में उनका कार्यकाल 11 साल से आगे बढ़ जाएगा. अगर मंजूरी नहीं मिली तो उन्हें अपने मूल सिक्किम कैडर में लौटना होगा.
सेवा विस्तार का पूरा रिकॉर्ड—
- 2015: यूपी में पांच साल की प्रतिनियुक्ति शुरू
- 2020: पहली बार एक साल का सेवा विस्तार
- 2021: दूसरी बार एक साल का विस्तार
- 2022: तीसरी बार एक साल का विस्तार
- 2023: चौथी बार एक साल का विस्तार
- 2024: पांचवीं बार छह महीने का विस्तार
- 2024: छठी बार फिर छह महीने का विस्तार
- 2025: सातवीं बार एक साल का सेवा विस्तार, जो 14 अगस्त 2026 तक था
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