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युद्ध के बीच ईरान में सत्ता बदलने की आहट, 24 दिसंबर के बाद क्या होगा?


Iran Regime Change Prediction 2026: ईरान और अमेरिका की लड़ाई अब ऐसी जगह पहुंच चुकी है, जहां एक गलत फैसला पूरे पश्चिम एशिया को फिर आग में झोंक सकता है. समुद्र में तेल के जहाज निशाने पर हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही सामान्य नहीं हो पाई है. अमेरिका नए प्रतिबंध लगा रहा है और ईरान पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है.

इसी बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है. क्या इस युद्ध का अगला अध्याय केवल मिसाइलों तक सीमित रहेगा या ईरान की सत्ता के भीतर भी बड़ा बदलाव होगा?

ईरान की स्थापना कुंडली में दिसंबर 2026 से जून 2027 के बीच ऐसा समय बन रहा है, जब देश का नेतृत्व भारी दबाव में आ सकता है. अचानक इस्तीफा, अधिकारों का बंटवारा, सैन्य नेतृत्व में फेरबदल या उत्तराधिकारी को लेकर खींचतान संभव है. हालांकि पूरी सत्ता बदलने का सबसे संवेदनशील दौर इसके बाद शुरू होता दिखाई देता है.

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होर्मुज में छिपी है दुनिया की सबसे बड़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य छोटा-सा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए इसकी अहमियत बहुत बड़ी है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक 2025 में 110 अरब घन मीटर से ज्यादा LNG इसी रास्ते से गुजरी थी. कतर का लगभग 93 प्रतिशत और UAE का 96 प्रतिशत LNG निर्यात होर्मुज पर निर्भर था.

अगस्त 2026 में ईरान ने 45 तेल टैंकरों को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया. कुछ भारतीय रिफाइनरी कंपनियां भी इन जहाजों से दूरी बनाने की तैयारी कर रही हैं. खतरा केवल जहाज के पकड़े जाने का नहीं है. युद्ध बीमा महंगा हो रहा है. मालभाड़ा बढ़ रहा है और कंपनियां रास्ता बदलने के लिए मजबूर हैं.

ईरान और ओमान अस्थायी समुद्री गलियारा बनाने पर बातचीत कर रहे हैं. अमेरिका ने सुरंगें हटाने का दावा भी किया है. फिर भी हाल में एक टैंकर पर हमला बता रहा है कि समुद्र अभी सुरक्षित नहीं है.

यह वही चिंगारी है जो शांति की कोशिशों को कुछ घंटों में खत्म कर सकती है.

ईरान की कुंडली में छिपा है बड़ा संकेत

ईरान की स्थापना कुंडली के लिए 1 अप्रैल 1979, दोपहर 3 बजे और तेहरान का समय लिया गया है. इसके अनुसार सिंह लग्न और वृषभ राशि बनती है.

इस कुंडली की सबसे चौंकाने वाली स्थिति लग्न में दिखाई देती है. यहां शनि और राहु साथ बैठे हैं. लग्न किसी देश की सत्ता, पहचान और नेतृत्व को दिखाता है. शनि लंबे दबाव का ग्रह है, जबकि राहु डर, भ्रम, गुप्त चाल और अचानक बदलते फैसलों से जुड़ा है.

इस योग का अर्थ यह नहीं कि सरकार हमेशा कमजोर रहेगी. यह सत्ता को बहुत कठोर और जिद्दी भी बनाता है. लेकिन जब दशा और गोचर इसे सक्रिय करते हैं, तब नेतृत्व अपने ही फैसलों में फंस सकता है. जनता का भरोसा कम होता है. सत्ता के भीतर अलग-अलग गुट बनने लगते हैं.

दूसरा बड़ा संकेत अष्टम भाव में है. यहां सूर्य, मंगल और नीच का बुध बैठा है. अष्टम भाव अचानक संकट, गुप्त सैन्य कार्रवाई, खुफिया अभियान, धमाका और सत्ता के भीतर होने वाले बदलाव से जुड़ा माना जाता है.

सूर्य सत्ता का ग्रह है. मंगल सेना और हथियारों का. बुध बातचीत और सूचना का. तीनों का अष्टम भाव में होना बताता है कि ईरान के लिए सबसे बड़ा खतरा घोषित युद्ध से नहीं, बल्कि किसी अचानक हुई घटना या गलत संदेश से पैदा हो सकता है.

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दिसंबर 2026 में क्या बदल सकता है?

ईरान की कुंडली में इस समय गुरु की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है. यह अवधि 10 जून 2027 तक रहेगी. इसके भीतर 30 जुलाई से 24 दिसंबर 2026 तक शुक्र की प्रत्यंतर दशा है.

शुक्र इस कुंडली में सत्ता और सेना से जुड़े दशम भाव का स्वामी होकर सप्तम भाव में बैठा है. सप्तम भाव दूसरे देशों, समझौतों और खुले शत्रुओं को दिखाता है. इसलिए 24 दिसंबर तक दो तस्वीरें साथ-साथ दिखाई देंगी.

एक तरफ ईरान अपनी सैन्य ताकत दिखाने की कोशिश करेगा. दूसरी तरफ पर्दे के पीछे समझौते की बातचीत भी चलती रहेगी. ओमान, पाकिस्तान या चीन जैसे देश संदेश पहुंचाने की भूमिका निभा सकते हैं.

सबसे बड़ा खतरा यह है कि कोई समझौता लगभग तैयार होकर अचानक टूट जाए. सप्तम भाव में जन्मकालीन केतु मौजूद है और इस समय गोचर का राहु भी इसी क्षेत्र को सक्रिय कर रहा है. इसलिए दोस्त और दुश्मन की सीमा साफ नहीं रहेगी. सार्वजनिक बयान कुछ और तथा बंद कमरे की बातचीत कुछ और हो सकती है.

क्या 24 दिसंबर के बाद सरकार गिर सकती है?

24 दिसंबर 2026 के बाद सूर्य की प्रत्यंतर दशा शुरू होने का संकेत मिलता है. सूर्य सीधे सत्ता, सर्वोच्च पद और शासक वर्ग का कारक है. ईरान की कुंडली में सूर्य अष्टम भाव में है. इसलिए दिसंबर के आखिरी सप्ताह से फरवरी 2027 के बीच नेतृत्व से जुड़ी कोई अचानक खबर सामने आ सकती है.

इसके कई रूप हो सकते हैं:

  • किसी बड़े नेता के अधिकार सीमित होना
  • सेना या सुरक्षा परिषद का प्रभाव बढ़ना
  • महत्वपूर्ण पद पर अचानक बदलाव
  • उत्तराधिकारी को लेकर अंदरूनी खींचतान
  • स्वास्थ्य या सुरक्षा कारणों से नेतृत्व का पीछे हटना

लेकिन इसे तत्काल जनक्रांति और पूरी सरकार के गिरने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता. उच्च का चंद्रमा और उच्च का गुरु बताते हैं कि ईरान की शासन व्यवस्था में संकट सहकर दोबारा खड़े होने की क्षमता भी है.

इसलिए दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच चेहरे या रणनीति बदल सकती है. पूरे शासन के बदलने का खतरा इससे आगे दिखाई देता है.

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सत्ता परिवर्तन का सबसे संवेदनशील समय कब?

ईरान की कुंडली में 10 जून 2027 को गुरु की महादशा समाप्त होगी और शनि की महादशा शुरू होगी. यह बदलाव साधारण नहीं है.

शनि ईरान के लग्न में जन्मकालीन राहु के साथ बैठा है. वह छठे और सातवें भाव का स्वामी भी है. ये भाव संघर्ष, विरोधी पक्ष, दूसरे देश और खुले युद्ध से जुड़े हैं. इसलिए जून 2027 से सरकार के लिए कहीं अधिक कठिन दौर शुरू हो सकता है.

जून 2027 से जून 2030 के बीच सत्ता का ढांचा बदलने, धार्मिक और सैन्य नेतृत्व के संबंधों में बदलाव तथा संविधान या उत्तराधिकारी को लेकर बड़ा फैसला होने की संभावना बढ़ेगी. इसमें भी 2027 का दूसरा हिस्सा और 2028 अधिक संवेदनशील दिखते हैं.

ज्योतिषीय योग तभी बड़ा शासन परिवर्तन बनता है, जब जमीन पर भी चार स्थितियां एक साथ बनें. अर्थव्यवस्था कमजोर हो, जनता का विरोध लंबे समय तक चले, सत्ता के भीतर गुटबाजी हो और सेना या सुरक्षा संस्थान एकमत न रहें.

यदि इन चारों में से केवल एक स्थिति बनेगी तो सरकार सख्ती बढ़ाकर टिक सकती है. लेकिन आर्थिक संकट, अंदरूनी बगावत और युद्ध में बड़ी क्षति एक साथ हुई तो शनि महादशा सत्ता की पूरी बनावट बदल सकती है.

भारत को इसकी कीमत कैसे चुकानी पड़ेगी?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है. हालांकि सरकार के अनुसार भारत अब करीब 40 देशों से तेल खरीदता है और लगभग 70 प्रतिशत आयात होर्मुज के बाहर के रास्तों से आ रहा है. इसलिए रास्ता बंद होते ही देश में तेल खत्म नहीं होगा.

असली चोट कीमतों से लगेगी. तेल महंगा होगा तो जहाज का किराया बढ़ेगा. रुपये पर दबाव आएगा. पेट्रोल-डीजल, हवाई टिकट और माल ढुलाई महंगी हो सकती है. इसका असर सब्जी, दूध, दवा, प्लास्टिक, पेंट और ऑनलाइन डिलीवरी तक दिखाई देगा.

खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की नौकरी और सुरक्षा भी चिंता का विषय है. संघर्ष के बाद 52,000 से अधिक भारतीयों को पहले ही क्षेत्र से वापस लाया जा चुका है. युद्ध फैला तो वापसी का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

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क्या तीसरा विश्वयुद्ध शुरू होने वाला है?

फिलहाल तीसरा विश्वयुद्ध कहना जल्दबाजी होगी. रूस और चीन जैसे देश सीधे युद्ध में उतरने के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव का रास्ता अपना सकते हैं. अरब देश भी अपने शहरों और तेल ठिकानों को युद्ध से बचाना चाहेंगे.

लेकिन खतरा वास्तविक है. होर्मुज में किसी बड़े जहाज पर हमला, अमेरिकी सैनिकों की भारी मौत या ईरान के परमाणु ठिकाने पर नई कार्रवाई पूरे समीकरण को बदल सकती है.

ईरान की कुंडली दिसंबर 2026 को महाविनाश की तय तारीख नहीं बताती. वह 24 दिसंबर के बाद नेतृत्व पर बढ़ते दबाव और जून 2027 से सत्ता की असली परीक्षा का संकेत देती है.

यानी दिसंबर अंत नहीं होगा. वह उस कहानी की शुरुआत हो सकता है, जिसमें युद्ध का मैदान समुद्र से निकलकर ईरान की सत्ता के गलियारों तक पहुंच जाए.

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