हिजाब को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को लेकर राजनीति बहस जारी है. इस बीच AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने हाई कोर्ट के फैसले पर असहमति जताई और कहा कि आप कौन होते हो ये तय करने वाले कि इस्लाम में क्या अनिवार्य है और क्या नहीं है.
जो अश्लील कपड़े पहनते हैं उनको बोलें- वारिस पठान
वारिस पठान ने कहा, “मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हूं क्योंकि संविधान हमें अपने धर्म को प्रैक्टिस करने की इजाजत देता है. मेरी आस्था मेरे साथ है, आपकी आस्था आपके साथ है. फ्रीडम ऑफ च्वाइस है. मेरी बहन को, मेरी मां को, मेरी बेटी को हिजाब पहनना है तो आप रोकने वाले कौन होते हो? कोई अश्लील कपड़े तो नहीं पहन रहा है जिससे किसी को आपत्ति है. जो अश्लील कपड़े पहनते हैं उनको बोलें.”
इस्लाम के ऊपर डायरेक्ट अटैक है- वारिस पठान
इसके आगे उन्होंने कहा, “ये एक तरफ आप बोलते हो नारी सम्मान, बेटी बचाओ और उसी बेटी को हिजाब पहनकर पढ़ने जाना है तो आप उसे रोक रहे हो. ये सरासर गलत बात है. आप कौन होते हो ये डिसाइड करने वाले कि ये इस्लाम के अंदर अनिवार्य है या नहीं? ये तो हमारे इस्लाम के ऊपर डायरेक्ट अटैक है. ये आर्टिकल 25 और 29 के ऊपर डायरेक्ट अटैक है.”
हम मंगलसूत्र-सिंदूर पर तो आपत्ति नहीं करते- वारिस पठान
वारिस पठान ने ये भी कहा, “हमारी हिंदू बहनें मंगलसूत्र लगती हैं, सिंदूर डालती हैं, अच्छी बात है. ये इनका फ्रीडम ऑफ च्वाइस है. हम तो आपत्ति नहीं करते हैं. हमारे सरदार भाई पगड़ी पहनते हैं. सबको प्रीडम ऑफ च्वाइस की इजाजत है. हर इंसान को संविधान ने अधिकार दिया है, उसी के हिसाब से देश चलेगा.”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक हालिया फैसले में एक छात्रा की हिजाब से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया. छात्रा ने अपनी मां के जरिए कोर्ट में याचिका दायर की थी और स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. कोर्ट ने विभिन्न फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.
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