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बारिश में इस राज्य के किसानों की बल्ले बल्ले, जमकर हुआ है मुनाफा


Farmer Profit: जम्मू-कश्मीर अर्थव्यवस्था में खेती और बागवानी का बड़ा योगदान है. यहां का मौसम और भौगोलिक वातावरण कई तरह की फसलों और फलों की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है. खासकर सेब, अखरोट, बादाम और सब्जियों की खेती किसानों की आमदनी का अहम जरिया है. जम्मू-कश्मीर में ऑफ-सीजन सब्जियों की खेती भी किसानों को बेहतर बाजार और कीमत दिलाने में मदद करती है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बागवानी क्षेत्र से लाखों लोगों को रोजगार मिलता है और इससे हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व जुड़ा है.

बारिश से फसलों को मिला फायदा

मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश होने पर खेतों में मिट्टी की नमी बनी रहती है, जिससे कई फसलों की बढ़वार बेहतर हो सकती है. जम्मू-कश्मीर में बारिश का फायदा खासकर उन क्षेत्रों में मिल सकता है जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है. हालांकि, जरूरत से ज्यादा बारिश होने पर जलभराव, भूस्खलन और फसल खराब होने का खतरा भी रहता है. इसलिए किसानों के लिए खेतों में जल निकासी और मौसम की जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है.

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बागवानी से बढ़ रही किसानों की कमाई

जम्मू-कश्मीर की पहचान सेब, अखरोट और बादाम जैसी बागवानी फसलों के लिए भी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यहां बागवानी क्षेत्र में फलों और ड्राई फ्रूट्स का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है. हाल ही में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए उत्पादन, कोल्ड-चेन, वैल्यू एडिशन और बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है. इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ती है.

ऑफ-सीजन सब्जियां भी बनीं कमाई का जरिया

जम्मू-कश्मीर में ऑफ-सीजन सब्जियों की खेती किसानों के लिए खास अवसर देती है. राज्य के कृषि-व्यापार विभाग के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां ऑफ-सीजन सब्जियों के उत्पादन में बढ़त देती हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है. सही फसल का चुनाव, मौसम के अनुसार बुवाई, बेहतर बीज और बाजार तक पहुंच किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.

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