- शिपिंग कंपनियों का भरोसा कम, बीमा व किराया महंगा।
पश्चिम एशिया में इतने लंबे वक्त युद्ध करने के बाद अब अमेरिका को समझ आ गया है कि ईरान के परमाणु बम होर्मुज ही है. अगर इसको कंट्रोल कर लिया, तो ईरान खत्म हो जाएगा. यही वजह है कि होर्मुज में एक बड़ा ऑपरेशन किया. 40 व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट किया गया, जिनमें 18 मिलियन बैरल तेल था. यह युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा मात्रा है. युद्ध से पहले रोजाना करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था.
अमेरिका ने होर्मुज के किनारों पर ईरान के ठिकानों पर 60 हमले किए हैं, इनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार, समुद्री अड्डे, माइन्स बिछाने की क्षमताएं और संचार केंद्र शामिल थे. एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को भी निष्क्रिय किया गया. साथ ही, ड्रोन हमलों का मुकाबला किया गया. अमेरिका की रणनीति अब बदल गई है, पहले परमाणु कार्यक्रम पर ज्यादा जोर था, अब मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ पर है.
ईरानी बंदरगाहों पर अब तक US की नाकेबंदी जारी
अमेरिका अब तक ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी जारी रखे हुए है, जिससे जुलाई से ईरान तेल निर्यात नहीं कर पा रहा है. ट्रंप प्रशासन इसे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का तरीका बता रहा है. अधिकारी कहते हैं कि ईरान अपनी क्षमताएं फिर से बना लेता है, इसलिए बार-बार हमले करने पड़ते हैं. इसे वे घास काटने या व्हैक-ए-मोल जैसा काम बताते हैं.
ईरान जहाजों को ट्रैक नहीं कर पा रहा- ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि ईरान जहाजों को ट्रैक नहीं कर पा रहा, क्योंकि रडार नष्ट कर दिए गए हैं. अमेरिका दावा कर रहा है कि स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण है, फिर भी शिपिंग कंपनियां पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं. बीमा महंगा है, जहाज किराये पर लेना बहुत महंगा पड़ रहा है, लेकिन व्यापारिक जहाजों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं लौटा है और तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं.
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