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Shardiya Navratri 2026: 100 साल बाद नवरात्रि पर दुर्लभ ‘गजकेसरी राजयोग’, 11 अक्टूबर से शुरू होगा महापर्व; जानें 12 राशियों पर असर


Shardiya Navratri 2026: इस साल शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से कलश स्थापना के साथ शुरू होने जा रहा है, जिसका समापन 19 अक्टूबर 2026 (महानवमी) को होगा और 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी. इस बार आश्विन मास की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो रहे नौ दिनों के इस महापर्व पर ग्रहों की एक बेहद दुर्लभ और शुभ स्थिति बनने जा रही है.

वैदिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार, करीब 100 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद नवरात्रि के दौरान देवगुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति से अत्यंत फलदायी ‘गजकेसरी राजयोग’ का निर्माण हो रहा है. ज्योतिष शास्त्र में गजकेसरी योग को पद-प्रतिष्ठा, अपार धन-संपत्ति, बुद्धि और सौभाग्य प्रदान करने वाला महायोग माना गया है. ऐसे में मां दुर्गा की नौ शक्तियों की आराधना के साथ इस महासंयोग का प्रभाव सभी 12 राशियों के करियर, सेहत और पारिवारिक जीवन पर व्यापक रूप से देखने को मिलेगा.

क्या है गजकेसरी योग का महत्व?

जब किसी कुंडली या गोचर में गुरु और चंद्र एक-दूसरे से केंद्र भाव (1, 4, 7, या 10वें घर) में हों अथवा दोनों की युति हो, तब गजकेसरी योग बनता है. नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ शक्तियों के साथ इस राजयोग का मिलन सभी 12 राशियों के करियर, सेहत और लव लाइफ में बड़ा बदलाव लाएगा.

गजकेसरी योग के 3 महा-उपाय

  • पीला नैवेद्य: देवगुरु को बलवान करने के लिए मां दुर्गा को बेसन के लड्डू या केसरिया खीर का भोग लगाएं.
  • मंत्र साधना: नवरात्रि में प्रतिदिन ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
  • पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार या अष्टमी-नवमी तिथि को चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें.

मेष से मीन, 12 राशियों का अचूक उपाय

मेष: कार्यक्षेत्र में प्रमोशन के प्रबल योग हैं. ऊर्जावान महसूस करेंगे और प्रेम संबंध मजबूत होंगे.

  • उपाय: मां स्कंदमाता को लाल गुलाब व बेसन के लड्डू चढ़ाएं; ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ का जाप करें.

वृषभ: लंबे समय से अटका धन मिलेगा. खान-पान पर ध्यान दें. दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ेगी.

  • उपाय: मां महागौरी को सफेद चंदन व मिश्री चढ़ाएं; छोटी कन्याओं को खीर खिलाएं.

मिथुन: नए प्रोजेक्ट्स और यात्रा के योग हैं. मानसिक तनाव कम होगा और रिश्तों में भरोसा बढ़ेगा.

  • उपाय: मां ब्रह्मचारिणी को दूर्वा व हरी इलायची अर्पित करें; गुरु मंत्र का 108 बार जाप करें.

कर्क: गजकेसरी योग का सर्वाधिक लाभ मिलेगा. मान-प्रतिष्ठा में उछाल आएगा और विवाह तय हो सकता है.

  • उपाय: मां शैलपुत्री को दूध की मिठाई का भोग लगाएं; पूजा स्थान पर चांदी का सिक्का रखें.

सिंह: कारोबार में बंपर मुनाफा होगा. मौसमी बीमारियों से बचें. पार्टनर संग तीर्थ यात्रा के योग हैं.

  • उपाय: मां कालरात्रि को गुड़हल का फूल चढ़ाएं और पीले फलों का दान करें.

कन्या: निवेश से बेहतरीन रिटर्न मिलेगा. सिरदर्द से सावधान रहें. जीवनसाथी की सलाह से तरक्की होगी.

  • उपाय: मां चंद्रघंटा को हरे फल चढ़ाएं; किसी जरूरतमंद को चने की दाल भेंट करें.

तुला: ऑफिस में सीनियर्स की सराहना मिलेगी. स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और लव लाइफ में नया मोड़ आएगा.

  • उपाय: मां कात्यायनी को इत्र व सफेद फूल अर्पित करें; केसर की खीर का नैवेद्य लगाएं.

वृश्चिक: आय के नए स्रोत बनेंगे, हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखें. बातचीत से गलतफहमियां दूर करें.

  • उपाय: मां सिद्धिदात्री को लाल चुनरी चढ़ाएं; तिजोरी में हल्दी की एक साबुत गांठ रखें.

धनु: भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. पुरानी बीमारियों से निजात मिलेगी और वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा.

  • उपाय: मां कुष्मांडा को पीले पुष्प व चने की दाल अर्पित करें; दुर्गा चालीसा का पाठ करें.

मकर: अचल संपत्ति खरीदने के रास्ते खुलेंगे. जोड़ों के दर्द में सतर्क रहें. पार्टनर का भावनात्मक साथ मिलेगा.

  • उपाय: मां कालरात्रि के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलाएं; सूखे मेवे का भोग लगाएं.

कुंभ: करियर में नई चुनौतियां बड़ा लाभ देंगी. दिनचर्या ठीक रखें और पार्टनर से संवाद बनाए रखें.

  • उपाय: मां ब्रह्मचारिणी को चमेली का इत्र अर्पित करें; साबुत उड़द की दाल का दान करें.

मीन: ज्ञान और बैंक बैलेंस दोनों में बढ़ोतरी होगी. मानसिक शांति मिलेगी और प्रेम संबंध प्रगाढ़ होंगे.

  • उपाय: मां चंद्रघंटा को केसर का तिलक लगाएं और पीली मिठाई का भोग अर्पित करें.

नवरात्रि दैनिक पूजा विधि

आसन व संकल्प: स्नान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर मनोकामना का संकल्प लें.

दीप प्रज्वलन: मां दुर्गा के सामने गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं.

श्रृंगार व अर्पण: देवी को रोली, अक्षत, पीला चंदन और राशि अनुसार ताजे पुष्प अर्पित करें.

भोग व जप: राशि अनुसार नैवेद्य अर्पित करें और 108 बार ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ का जाप करें.

आरती: अंत में कर्पूर जलाकर मां की आरती करें और क्षमा प्रार्थना के साथ पूजा संपन्न करें.

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