क्या घर या जमीन पर सालों तक कब्जा करने पर किसी का उस पर मालिकाना हक साबित हो जाता है? अगर आपके मन में भी ये सवाल है, तो अब कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस सवाल का जवाब दे दिया है और साफ कर दिया है कि ऐसे ही मालिकाना हक किसी को नहीं मिल जाता है.
दरअसल हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसे लेकर एक अहम फैसला किया है, जिसमें कहा गया है कि किसी जमीन पर 40 साल तक कब्जा होना या सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना, अपने आप मालिकाना हक साबित नहीं करता. इतनी ही नीं कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया है कि जमीन पर कब्जा, राजस्व रिकॉर्ड और कानूनी मालिकाना हक तीन अलग-अलग चीजें हैं.
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क्या है पूरा मामला?
तुमकुरु जिले के सीरा तालुक में रहने वाले होरकेरप्पा को 1951 में माधुगिरी के असिस्टेंट कमिश्नर के आदेश से ये जमीन मिली थी. इसके बाद वो जमीन का राजस्व भी भरते रहे और जमीन से उनका संबंध बना रहा. विवाद तब शुरू हुआ जब थिम्मप्पा ने 1998 में एरन्ना से पड़ोस की जमीन खरीदी. इसके बाद उसने होरकेरप्पा की जमीन पर भी अपना दावा करना शुरू कर दिया. कुछ सालों के राजस्व रिकॉर्ड में थिम्मप्पा का नाम भी दर्ज था.
थिम्मप्पा के परिवार का इस जमीन पर करीब 40 साल से कब्जा था. पहली नजर में ये मामला लंबे कब्जे के आधार पर मालिकाना हक का लग सकता था. लेकिन कोर्ट के सामने रखे गए दूसरे सबूतों से स्थिति अलग निकली. थिम्मप्पा की 1998 की बिक्री डीड में होरकेरप्पा को पड़ोसी बताया गया था और उनकी जमीन की सीमाओं का भी उल्लेख था. थिम्मप्पा ने कोर्ट में ये भी माना था कि मूल सर्वे नंबर में जमीन होरकेरप्पा को आवंटित की गई थी.
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कोर्ट का फैसला
इस मामले में कोर्ट ने 80 साल के होरकेरप्पा के चार एकड़ से ज्यादा जमीन पर मालिकाना हक दे दिया. जस्टिस एचपी संधेश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल लंबे समय तक किसी जमीन पर कब्जा रहने से व्यक्ति उसका मालिक नहीं बन जाता. इसी तरह, राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने या गलत नाम दर्ज होने से भी जमीन का मालिकाना हक अपने आप किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं मिल जाता.
जमीन मालिकों की सीख
इस फैसले के बाद जमीन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात ये है कि वो मूल जमीन के दस्तावेज, म्यूशन रिकॉर्ड, RTC, सर्वे रिकॉर्ड और कब्जे से जुड़े कागजात संभालकर रखें. साथ ही, समय-समय पर सरकारी रिकॉर्ड में जमीन की जानकारी भी जांचते रहें. अगर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम गलत तरीके से दर्ज हो गया है या कोई व्यक्ति जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर रहा है, तो उसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
