गणेश चतुर्थी की रौनक अब सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही, कॉर्पोरेट केबिन और स्टार्टअप्स में भी बप्पा का स्वागत पूरे उत्साह के साथ हो रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर और ऑफिस में गणपति विराजने के नियम एक जैसे नहीं होते? वास्तु और धर्मशास्त्र के मुताबिक, कार्यस्थल पर बप्पा की स्थापना के कायदे पूरी तरह अलग हैं.
अगर आप भी इस बार ऑफिस में विघ्नहर्ता को लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो ये जरूरी बातें अनदेखी न करें.
घर और ऑफिस की स्थापना में 3 अंतर
- मूर्ति का स्वरूप: घर में आमतौर पर संतान रूप, क्रीड़ा करते हुए या थोड़े चंचल भाव वाले बप्पा की प्रतिमा लाई जाती है. वहीं ऑफिस या दुकान के लिए हमेशा शांत, गंभीर और पद्मासन (बैठी मुद्रा) में विराजमान गणेश जी की मूर्ति सबसे उत्तम मानी जाती है.
- संकल्प और उद्देश्य: घर की पूजा का मुख्य उद्देश्य परिवार में सुख, शांति, स्वास्थ्य और आपसी प्रेम होता है. इसके उलट, ऑफिस में पूजा का संकल्प आर्थिक स्थिरता, व्यापारिक वृद्धि, अटके प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और टीम के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए लिया जाता है.
- सेवा और अनुशासन: घर में खान-पान और साफ-सफाई पर पूरा नियंत्रण रहता है. ऑफिस में कई लोग आते-जाते हैं, इसलिए कार्यस्थल पर मर्यादा, पवित्रता और समय की पाबंदी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है.
दफ्तर में बप्पा को लाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
सही दिशा का चुनाव: ऑफिस में गणेश जी की चौकी हमेशा उत्तर-पूर्व कोण (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में ही स्थापित करें. यह दिशा नए अवसरों और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती है. ध्यान रखें कि मूर्ति की पीठ कभी भी ऑफिस के मुख्य हॉल या केबिन के अंदर की तरफ न हो.
सूंड की दिशा पर दें ध्यान: कार्यस्थल के लिए हमेशा बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड (वाममुखी) वाले गणपति की प्रतिमा ही चुनें. दाईं ओर सूंड वाले बप्पा (सिद्धिविनायक) की पूजा में बेहद कड़े और सटीक नियमों का पालन करना पड़ता है, जो एक व्यस्त दफ्तर के माहौल में संभव नहीं हो पाता.
बीम और वॉशरूम से बनाएं दूरी: चौकी लगाने से पहले जगह का चयन सावधानी से करें. मूर्ति को कभी भी छत की भारी बीम के नीचे, सीढ़ियों के नीचे या वॉशरूम की दीवार से सटाकर न रखें.
21 दूर्वा जरूर चढ़ाएं: कामकाज में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए बप्पा को दूर्वा (दूब घास) की 21 गांठें अर्पित करना बेहद फलदायी माना जाता है. साथ ही मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं.
टीम के साथ आरती का समय तय करें: दफ्तर में सुबह काम शुरू होने से ठीक पहले और शाम को काम खत्म होने के बाद पूरी टीम के साथ एक संक्षिप्त आरती जरूर करें. इससे कार्यस्थल पर तनाव घटता है और एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
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