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Xप्लेन: बंगाल में मांसाहार पर धीरेंद्र शास्त्री का ‘विवादित बयान’, TMC-कांग्रेस ने घेरा, BJP ने लगाई लताड़


मध्य प्रदेश के धार्मिक नेता धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर बाबा) के दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार पर दिए गए एक बयान ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और सांस्कृतिक विवाद खड़ा कर दिया है. हावड़ा ज़िले के लिलुआ में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा के दौरान उन्होंने दुर्गा पूजा पंडालों के पास मांसाहारी भोजन पर सवाल उठाए और इसे “गंदा खाना” और मांसाहार करने वालों को “पाखंडी” कहा.

विवाद का मुख्य कारण 

दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार पर आपत्ति जताते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बयान दिया जो विवाद का विषय बना. लिलुआ में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों के आसपास अशुद्ध/मांसाहारी भोजन तैयार और खाया जाता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे लोगों को बाहर निकालें क्योंकि वे पवित्र नहीं हैं और धर्म का अपमान कर रहे हैं. इस बयान का वीडियो वायरल होते ही स्थानीय बंगाली समाज में तीखी प्रतिक्रिया हुई.

पुलिस शिकायत और एफआईआर 

दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस ने 8 सितंबर 2026 को भवानीपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराने और धीरेंद्र शास्त्री की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शिकायत दी. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. इसके अलावा कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) और कई अन्य थानों में भी लिखित शिकायतें भेजी गईं.

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं 

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद से ही वो कांग्रेस-बीजेपी और राज्य की आम जनता के निशाने पर आ गए हैं. आइए देखें किसने क्या बयान दिया है.

TMC का हमला: तृणमूल कांग्रेस ने इस बयान को बंगाली संस्कृति और परंपराओं का सीधा अपमान करार दिया. टीएमसी ने कहा कि बंगाल के लोग अपने रीति-रिवाजों और त्योहारों को मनाने के तरीके में किसी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप या आदेश बर्दाश्त नहीं करेंगे. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा बंगाल के लोगों की थाली से मछली और मांस छीनना चाहती है.

BJP ने बनाई दूरी: विवाद बढ़ता देख पश्चिम बंगाल BJP के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस बयान से दूरी बना ली. उन्होंने कहा

“बंगाली लोग मछली और मांस कैसे नहीं खा सकते? स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि मां काली को मटन (भोग के तौर पर) चढ़ाया जाएगा. अगर कोई विवेकानंद से ऊपर उठने की कोशिश करता है, तो यह खतरनाक है. यह उनकी व्यक्तिगत राय है.”

पुरानी चुनावी असहजता: खाने-पीने की आदतों पर विवाद BJP के लिए संवेदनशील रहा है. इससे पहले भी चुनाव के दौरान जब यह प्रचार हुआ था कि BJP सत्ता में आकर शाकाहार थोपेगी, तब पार्टी नेताओं को बंगाली मतदाताओं को आश्वस्त करने के लिए सार्वजनिक रूप से मछली खानी पड़ी थी.

बंगाली संस्कृति और शाक्त परंपरा 

पत्रकार अभिजीत मजूमदार समेत कई विचारकों ने स्पष्ट किया कि बंगाल हिंदुत्व और शाक्त पूजा का प्रमुख केंद्र है. कोलकाता की दुर्गा पूजा भक्ति और सांस्कृतिक खान-पान की परंपराओं का अनूठा मिश्रण है.

व्रत नहीं, उत्सव और दावत: अन्य राज्यों के विपरीत, बंगाल में दुर्गा पूजा को देवी दुर्गा (बेटी) के अपने बच्चों के साथ मायके लौटने के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसलिए यह त्योहार उपवास के बजाय आदर-सत्कार और दावतों पर केंद्रित होता है.

शाक्त परंपरा और ‘निरामिश मांगशो’: बंगाल में देवी शक्ति की पूजा की मुख्य धारा शाक्त धर्म है. ऐतिहासिक रूप से, पूजा में दी जाने वाली बलि के बाद बिना प्याज-लहसुन का पका हुआ मटन (निरामिश मांगशो) पवित्र प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

मछली (माछ) का शुभ प्रतीक: बंगाली संस्कृति में मछली को केवल मांस नहीं, बल्कि समृद्धि और अच्छे भाग्य का प्रतीक माना जाता है. देवी को मछली का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है.

महा नवमी और बिजोया दशमी की रस्में: नवमी पर परिवारों में मटन कोशा और मछली के विशेष व्यंजन बनते हैं. वहीं बिजोया दशमी पर विदाई के बाद एकता और उत्सव के प्रतीक रूप में मटन, मछली और मिठाइयां बांटी जाती हैं.

स्ट्रीट फूड और पंडाल हॉपिंग: पूजा के दिनों में कोलकाता एक बड़े फूड कार्निवल में बदल जाता है, जहां लाखों लोग रात भर पंडाल घूमते हुए कोलकाता मटन बिरयानी, रोल और फिश फ्राई का आनंद लेते हैं.

VHP का रुख: इस विवाद से कुछ दिन पहले (26 अगस्त को) विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी बयान जारी कर दुर्गा पूजा पंडालों से मांसाहारी भोजन दूर रखने की बात कही थी.

राज्य सरकार का आतिथ्य: लिलुआ कार्यक्रम से पहले राज्य के ऑडिटोरियम ‘सौजन्य’ में धीरेंद्र शास्त्री के लिए डिनर आयोजित किया गया था, जिसमें कैबिनेट मंत्री शामिल हुए थे. मुख्यमंत्री कार्यालय ने X पर उन्हें “बागेश्वर महाराज” संबोधित करते हुए तस्वीरें साझा की थीं.



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