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डल झील में ‘शिकारा रैली’ से नशा मुक्ति का संदेश, जम्मू-कश्मीर में तस्करों पर ‘जीरो टॉलरेंस’


जम्मू-कश्मीर को नशे के गंभीर संकट से उबारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है. जम्मू संभाग में 11 अप्रैल से चल रहे 100-दिवसीय ‘नशा मुक्त अभियान’ के बाद अब कश्मीर घाटी में भी 3 मई से इस सघन अभियान का आगाज होने जा रहा है. उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने एक कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा करते हुए ड्रग तस्करों के खिलाफ ‘जीरो-टॉलरेंस’ (Zero-Tolerance) नीति अपनाने का सख्त संदेश दिया है.

जब्त होगी संपत्ति, रद्द होंगे पासपोर्ट

उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. ड्रग तस्करों और विक्रेताओं की कमर तोड़ने के लिए प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा. इसके तहत न केवल दोषियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी, बल्कि उनके पासपोर्ट और अन्य अहम सरकारी पहचान पत्र भी रद्द कर दिए जाएंगे.

डल झील में गुंजा संदेश- ‘नशे को ना, जिंदगी को हां’

इस अभियान को एक जन-आंदोलन बनाने के लिए गुरुवार (16 अप्रैल) को पर्यटन विभाग और श्रीनगर जिला प्रशासन ने डल झील में एक विशाल और शानदार ‘शिकारा रैली’ का आयोजन किया. इस रैली के जरिए स्थानीय लोगों और वहां पहुंचे हजारों पर्यटकों को “नशे को ना, ज़िंदगी को हाँ” का सशक्त संदेश दिया गया, ताकि समाज में एक स्वस्थ जीवन शैली को प्रेरित किया जा सके.

डराने वाले हैं जम्मू-कश्मीर में नशे के आंकड़े

सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. प्रदेश के लगभग 13.5 लाख लोग (आबादी का करीब 10%) नशे की गिरफ्त में हैं. सबसे खौफनाक बात यह है कि इनमें 10 से 17 साल की उम्र के 1.68 लाख नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 90-95% नशेड़ी खतरनाक ‘हेरोइन’ का सेवन कर रहे हैं. वर्ष 2022 से अब तक नशे के दुरुपयोग के 32,500 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें श्रीनगर और जम्मू जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

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इलाज और काउंसलिंग के लिए मजबूत हुआ सिस्टम

प्रशासन न केवल तस्करों पर नकेल कस रहा है, बल्कि पीड़ितों के इलाज और पुनर्वास पर भी पूरा जोर दे रहा है. ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के तहत. राज्य के सभी 20 जिलों में नशा मुक्ति OPD सेवाएं और ‘एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटीज’ (ATFs) काम कर रही हैं. 9 मेडिकल कॉलेजों (GMCs) में IPD सेवाएं उपलब्ध हैं. 2020 से अब तक 83,000 से ज्यादा लोगों का सफल इलाज किया जा चुका है. किसी भी तुरंत मदद और काउंसलिंग के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर- 14446 जारी किया गया है.

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